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एक साल पहले बना पुल ध्वस्त
एक साल पहले बना पुल ध्वस्त
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कुदरत का कहर : असम में ताश के पत्तों की तरह बहा 300 मीटर लंबा पुल, अरुणाचल में लैंडस्लाइड से थमी ज़िंदगी

पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश ने असम और अरुणाचल प्रदेश में व्यापक तबाही मचा दी है। असम के धेमाजी जिले में तेज बहाव के कारण एक साल पुराना 300 मीटर लंबा लोहे का पुल नदी में बह गया, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया और छात्रों व किसानों की मुश्किलें बढ़ गईं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 29 Jun 2026, 07:54 AM · अपडेट: 03 Oct 2026, 04:48 AM
गुवाहाटी
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
पूर्वोत्तर भारत में आसमान से बरस रही आफत ने आम जनजीवन को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं और पहाड़ दरक रहे हैं। असम से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक हर तरफ तबाही का मंजर है। 
असम के धेमाजी में जहां एक साल पुराना लोहे का पुल नदी के तेज बहाव में तिनके की तरह बह गया, वहीं अरुणाचल प्रदेश में भीषण भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के कारण नेशनल हाईवे-13 पूरी तरह ठप हो गया है। इस आपदा में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। असम के धेमाजी जिले से तबाही की एक बेहद डराने वाली तस्वीर सामने आई है। 

संपर्क पूरी तरह टूटा 

रविवार को अरुणाचल के पहाड़ी इलाकों से आए भारी पानी के कारण अचानक केमी नदी का जलस्तर बढ़ गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि केमी और ओयान को जोड़ने वाला करीब 300 मीटर लंबा लोहे का मजबूत पुल देखते ही देखते नदी में विलीन हो गया। इस पुल के ढहने से केमी-पुराना जेलोम क्षेत्र का जोनाई सदर से जमीनी संपर्क पूरी तरह टूट गया है। ग्रामीणों में आक्रोश: स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल महज एक साल पहले ही बनकर तैयार हुआ था। 

छात्रों पढ़ाई अधर में लटकी

निर्माण के समय ही प्रशासन से कंक्रीट का स्थायी पुल बनाने की मांग की गई थी, लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। नतीजा आज सबके सामने है। इस पुल के टूटने का सबसे बड़ा खामियाजा स्थानीय छात्रों और किसानों को भुगतना पड़ रहा है। नदी पार स्थित स्कूल तक पहुंचने का यही एकमात्र सहारा था। अब जबकि परीक्षाएं सिर पर हैं, छात्रों की पढ़ाई अधर में लटक गई है। 

रोजी-रोटी पर संकट 

वहीं, खेती का सीजन होने के कारण किसान भी अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट मंडराने लगा है। दूसरी तरफ, सीमावर्ती राज्य अरुणाचल
भूस्खलन के बाद
प्रदेश में भी हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। पसीघाट-पांगिन मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग-13 (NH-13) के कई हिस्सों में बड़े-बड़े बोल्डर गिरने और सड़क धंसने के कारण यातायात पूरी तरह ठप है। खासकर रेंगिंग और येंबुंग के बीच के रास्ते मलबे में तब्दील हो चुके हैं, जिससे सैकड़ों गाड़ियां जहां-की-तहाँ फंसी हुई हैं। 

आपदा में मरने वालों की संख्य बढ़ी

अरुणाचल में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन जानलेवा साबित हो रही है। पापुम पारे जिले में मलबे से एक और शव बरामद होने के बाद इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। राज्य के कई हिस्सों में बस्तियां जलमग्न हैं और सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय प्रशासन और बचाव दल युद्धस्तर पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। राहत और बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा लगातार हो रही बारिश बन रही है। 

मौसम विभाग ने दी चेतावनी

सड़कों से मलबा हटाने का काम जारी है, लेकिन ऊपर से गिरते पत्थरों के कारण काम बार-बार रोकना पड़ रहा है। प्रशासन ने सख्त हिदायत जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि जब तक बेहद जरूरी न हो, घरों से बाहर न निकलें और भूस्खलन वाले संवेदनशील इलाकों में जाने से बचें। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को हाई अलर्ट पर रहने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कंट्रोल रूम से संपर्क करने को कहा गया है।
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