बैठक खत्म होने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा:
"हम आंदोलनकारियों के मुद्दों को समझने और उन पर गंभीरता से चर्चा करने आए थे। करीब दो घंटे तक काफी सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई। उन्होंने मुख्य रूप से तीन मांगे सामने रखी हैं। हमने उनसे कहा है कि सरकार इन बिंदुओं पर विचार कर कल दोपहर बाद दोबारा बैठक करेगी।"

CJP की 3 मुख्य शर्तें: 'इस्तीफे पर नो-कॉम्प्रोमाइज'
वार्ता के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने मीडिया को बताया कि पार्टी ने सरकार के सामने अपनी शर्तें पूरी स्पष्टता से रख दी हैं।
CJP की प्रमुख माँगें:
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा (जिस पर CJP के मुताबिक कोई समझौता नहीं हो सकता)।
पीड़ित परिवारों को राहत: NEET पेपर लीक से आहत होकर खुदकुशी करने वाले छात्रों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा।
मुकदमे वापसी: हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान कार्यकर्ताओं और छात्रों पर दर्ज सभी FIR वापस ली जाएं।
जंतर-मंतर पर अभी भी युवाओं का जमावड़ा
सौरव दास ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं लेती है, तो इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा। गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पिछले एक महीने से चल रहे इस आंदोलन की सबसे बड़ी मांग रहा है। बीते 20 जुलाई को जब प्रदर्शनकारी छात्रों ने संसद भवन की ओर मार्च करने की कोशिश की थी, तब स्थिति बेकाबू हो गई थी और झड़प की खबरें आई थीं। फिलहाल दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं का जमावड़ा बना हुआ है। सरकार की ओर से लगातार शांति और शांतिपूर्ण समाधान की अपील की जा रही है, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर आश्वासनों का कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर कड़ा संदेश दिया है। पीएम ने स्पष्ट किया:
"देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के दोषियों को सख्त और त्वरित सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें (Fast-track Courts) गठित करने का फैसला लिया गया है।"
दूसरे बैठक पर पूरे देश की निगाहें
प्रधानमंत्री के इस बयान पर CJP ने तीखा पलटवार किया है। मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि ऐसी घोषणाएं महज जनता को बहलाने का जरिया हैं। उन्होंने कहा, "हमें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जवाबदेही चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना आंदोलन खत्म होने का सवाल ही नहीं उठता।" केंद्र सरकार और CJP के बीच कल दोपहर बाद होने वाली दूसरे दौर की बैठक पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार आंदोलनकारियों की मांगों के आगे झुकती है या बीच का कोई रास्ता निकलता है।