नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया है। इस साल नीट यूजी परीक्षा परिणाम में सामाजिक और शैक्षणिक स्तर पर एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। चिकित्सा शिक्षा के इतिहास में पहली बार सफल होने वाले छात्रों में अन्य पिछड़ा वर्ग की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। कुल सफल छात्रों में से लगभग हर दूसरा छात्र इसी वर्ग से संबंध रखता है। इस साल करीब 20 लाख छात्रों ने यह कठिन परीक्षा दी थी। इनमें से 11 लाख 21 हजार छात्रों ने मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए सफलता हासिल की है। हालांकि वर्ष 2020 और 2021 के बाद यह पहला मौका है जब कोई भी छात्र 720 अंकों का पूर्ण अंक हासिल नहीं कर पाया। यही वजह है कि इस बार शीर्ष सूची में भी बड़ा बदलाव आया है।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में दिखी सबसे तेज बढ़ोतरी
आंकड़ों के अनुसार पिछले 7 वर्षों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परीक्षार्थियों की संख्या में सबसे तेज वृद्धि हुई है। इस वर्ग में कुल 76.30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बाद अनुसूचित जाति के परीक्षार्थी 63.52 प्रतिशत बढ़े हैं। सामान्य वर्ग में यह वृद्धि सिर्फ 24.52 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों के मुताबिक आरक्षण लागू होने के बाद इस वर्ग की भागीदारी में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है।
छोटे राज्यों का शानदार प्रदर्शन और शीर्ष छात्रों की स्थिति
चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा 70.14 प्रतिशत छात्र सफल हुए हैं। इसके बाद मिजोरम, मणिपुर और नगालैंड जैसे छोटे राज्यों का प्रदर्शन भी बहुत बेहतर रहा। बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा छात्रों ने परीक्षा दी थी। हालांकि राजस्थान बड़े राज्यों में एक बड़ा अपवाद रहा जहां लगभग 69.34 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल रहे। अखिल भारतीय रैंकिंग के टॉप 138 में 109 लड़के और 29 लड़कियां शामिल हैं। पेपर लीक के आरोपों के बाद यह परीक्षा 21 जून को दोबारा आयोजित की गई थी। इसके बाद नई मूल्यांकन प्रक्रिया से परिणाम समय पर जारी किया गया।