नीट यूजी 2026 के नतीजों में हरियाणा के पंशुल बंसल ने 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 प्राप्त की। यह उपलब्धि लगातार तीन वर्षों की मेहनत, अनुशासन और सही रणनीति का परिणाम है। पहले हुए नीट एग्जाम में उनका स्कोर उम्मीद के मुताबिक नहीं था, लेकिन दोबारा मिले मौके का उन्होंने पूरा फायदा उठाया और देश के टॉप छात्रों में अपनी जगह बना ली। अब उनका सपना एम्स से एमबीबीएस कर एक कुशल डॉक्टर बनना है।
बचपन का सपना बना सफलता
पंशुल को बचपन से ही मेडिकल क्षेत्र में जाने की इच्छा थी। बायोलॉजी उनका पसंदीदा विषय था और उन्होंने शुरू से ही डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय कर लिया था। परिवार ने भी उन्हें अपनी पसंद का करियर चुनने की पूरी आजादी दी, जिससे वे बिना किसी दबाव के अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर सके।
सातवीं कक्षा में तय कर लिया था करियर
पंशुल बताते हैं कि उन्होंने सातवीं कक्षा में ही फैसला कर लिया था कि उन्हें डॉक्टर बनना है। इसके बाद उनकी पूरी पढ़ाई उसी लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ी। उनका मानना है कि यदि छात्र समय रहते अपना लक्ष्य तय कर लें तो पढ़ाई की दिशा सही रहती है और कॉन्सेप्ट भी मजबूत बनते हैं।
रुचि के अनुसार चुनें अपना करियर
पढ़ने की आदत ही बनाती है टॉपर
उनके अनुसार नियमित रूप से किताबें पढ़ना सबसे जरूरी है। लगातार अध्ययन करने से याद रखने की क्षमता बढ़ती है और लंबे समय तक पढ़ाई करना आसान हो जाता है। धीरे-धीरे पढ़ाई बोझ नहीं, बल्कि आदत बन जाती है।
समय से पहले शुरू कर दी थी तैयारी
NCERT को बनाया सबसे बड़ा हथियार
पंशुल ने नीट की तैयारी में एनसीईआरटी की किताबों को सबसे ज्यादा महत्व दिया। खासकर बायोलॉजी की किताबों को उन्होंने कई बार पढ़ा। उनका मानना है कि हर पैराग्राफ को इस नजरिए से पढ़ना चाहिए कि उससे किस तरह के सवाल पूछे जा सकते हैं। यही तरीका उनकी सफलता की बड़ी वजह बना।
गलतियों की अलग कॉपी बनाई
हर टेस्ट और मॉक परीक्षा के बाद वे अपनी सभी गलतियों को एक अलग कॉपी में लिखते थे। बाद में उन्हीं गलतियों की दोबारा समीक्षा करते थे। इससे बार-बार होने वाली गलतियों पर नियंत्रण मिला और प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया।