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देशी मुर्गी पालन की व्यवस्था है
देशी मुर्गी पालन की व्यवस्था है
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नई रफ्तार :  7 पंचायतों में आधुनिक बकरी शेड से बढ़ेगी पशुपालकों की आय  

जिला प्रशासन ने मनरेगा के तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए 7 ग्राम पंचायतों में लगभग 3 लाख रुपये प्रति इकाई लागत से आधुनिक बकरी पालन शेड स्वीकृत किए हैं। इन शेडों का निर्माण वैज्ञानिक मॉडल पर किया जाएगा, जिससे पशुओं को मौसम और बीमारियों से सुरक्षा मिलेगी तथा उत्पादन और आय में वृद्धि होगी। योजना में बकरी पालन के साथ देशी मुर्गी पालन को भी एकीकृत किया गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे। साथ ही पशुपालकों को चारा, स्वास्थ्य सेवाएं और तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यह पहल रोजगार सृजन, स्थायी परिसंपत्ति निर्माण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कीर्तिमान न्यूज
14 Jun 2026, 04:09 PM
गरियाबंद

जिला प्रशासन ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, पशुपालकों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने और नए रोजगार अवसर सृजित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत जिले की 7 ग्राम पंचायतों में आधुनिक बकरी पालन शेडों की स्वीकृति दी गई है। प्रत्येक इकाई की अनुमानित लागत लगभग 3 लाख रुपये तय की गई है।

बकरी पालन ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से आजीविका का प्रमुख साधन रहा है, लेकिन उपयुक्त आवासीय ढांचे और वैज्ञानिक प्रबंधन के अभाव में पशुपालकों को अक्सर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। नई योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से युक्त शेडों का निर्माण कर पशुपालकों को सुरक्षित और टिकाऊ पशुपालन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। 

वैज्ञानिक मॉडल पर निर्माण

स्वीकृत बकरी पालन शेडों का निर्माण वैज्ञानिक मानकों के अनुसार ऊंचे और सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा। इससे पशुओं को वर्षा, जलभराव, अत्यधिक गर्मी और अन्य प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से सुरक्षा मिलेगी। शेडों में पर्याप्त वेंटिलेशन, स्वच्छ वातावरण, जल निकासी व्यवस्था और सुरक्षित रख-रखाव की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। 

एकीकृत मॉडल

इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे एकीकृत आजीविका मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। आधुनिक बकरी शेडों के नीचे देशी मुर्गी पालन की भी व्यवस्था की जाएगी। इससे एक ही परिसर में दो आय स्रोत विकसित होंगे। बकरी पालन से दूध, खाद और पशु बिक्री के माध्यम से आय प्राप्त होगी, जबकि देशी मुर्गी पालन से अंडा और मांस उत्पादन के जरिए अतिरिक्त कमाई होगी। 

ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में कदम

कम लागत में अधिक उत्पादन और बहुआयामी आय के अवसर इस योजना की सबसे बड़ी ताकत हैं। इससे ग्रामीण परिवारों को आर्थिक स्थिरता मिलेगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे। यह पहल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी, जिससे पलायन की प्रवृत्ति में कमी आने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य सेवाएं और तकनीकी

योजना के तहत केवल शेड निर्माण ही नहीं, बल्कि पशुपालकों को हरे चारे की उपलब्धता, संतुलित आहार, नियमित टीकाकरण, पशु स्वास्थ्य सेवाएं और आधुनिक पशुपालन तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे पशुपालकों की दक्षता बढ़ेगी और वे अपने व्यवसाय को अधिक लाभकारी बना सकेंगे।

सतत ग्रामीण विकास 

जिला प्रशासन द्वारा कार्यों के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मनरेगा के तहत विकसित यह एकीकृत बकरी एवं मुर्गी पालन मॉडल ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण बनेगा। यह पहल आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण और सतत ग्रामीण विकास के लक्ष्य को नई गति प्रदान करेगी।

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