दुर्ग जिले में भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) से स्क्रैप चोरी के मामले में पुलिस की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। इस संगठित नेटवर्क के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत गिरफ्तार तीन आरोपियों की सात दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद सोमवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
जांच के दौरान पुलिस को चोरी से अर्जित रकम के निवेश से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। मुख्य आरोपी संजय सिंह से पूछताछ में सामने आया कि अवैध तरीके से कमाए गए पैसों को जमीन, मकान और सोने-चांदी के आभूषणों में लगाया गया था। इसके बाद पुलिस ने उसके लॉकर की जांच की, जहां से लगभग 50 लाख रुपए मूल्य के जेवर और करीब 3 करोड़ रुपए की संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए।
मामले का खुलासा
250 टन स्क्रैप और करोड़ों की सामग्री जब्त
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 250 टन लोहे की प्लेट, बीम कटिंग और अन्य स्क्रैप सामग्री जब्त की। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 90 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा परिवहन और लोडिंग में इस्तेमाल होने वाले वाहन तथा मशीनें भी जब्त की गईं। कुल जब्ती का मूल्य करीब 3.22 करोड़ रुपये आंका गया है।
इस मामले में पहले ही नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था, जबकि मुख्य आरोपी संजय सिंह फरार चल रहा था। उसकी तलाश में पुलिस टीम उत्तर प्रदेश पहुंची और देवरिया से उसे गिरफ्तार किया गया। 16 जून को गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे सात दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की।
पूछताछ के दौरान अमित शर्मा उर्फ कैलाश शर्मा और आकाश कुमार सिंह की संलिप्तता भी सामने आई, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने चोरी किए गए लोहे की बिक्री और उससे प्राप्त धनराशि को संपत्तियों में निवेश करने की बात स्वीकार की है।