Omkareshwar: सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों का विरोध: विस्थापन के डर से ठप रही तीर्थनगरी
Omkareshwar: मध्य प्रदेश के धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत चल रहे विकास कार्यों और डूकिया क्षेत्र में संभावित विस्थापन के विरोध में स्थानीय नागरिकों ने दो दिवसीय हड़ताल की। बाजार, होटल, गेस्ट हाउस और परिवहन सेवाएं बंद रहने से श्रद्धालुओं को फूल-प्रसाद, भोजन और आवागमन में परेशानी हुई। स्थानीय नागरिक परिषद की 19 मांगों में से 18 पर सहमति बनने की बात सामने आई है, लेकिन विस्थापन के मुद्दे पर अभी समाधान का इंतजार है।
प्रकाशित: 19 Oct 2026, 02:52 PM· 3 मिनट पढ़ने का समय
ओंकारेश्वर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Omkareshwar: सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर में चल रहे चौड़ीकरण और विकास कार्यों के बीच स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा है। अपने बरसों पुराने मकान-दुकान टूटने और डूकिया क्षेत्र में पुनर्वास (विस्थापन) की आशंका को लेकर स्थानीय नागरिक परिषद के आह्वान पर बुलाई गई दो दिवसीय हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। बाजार पूरी तरह ठप रहने से जहां करोड़ों के व्यापारिक नुकसान का अनुमान है, वहीं दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
दुकानें और परिवहन सेवाएं बंद, पसरा सन्नाटा
नागरिकों के इस विरोध प्रदर्शन को क्षेत्र में अभूतपूर्व समर्थन मिला। छोटे-बड़े व्यापारियों, होटल और गेस्ट हाउस मालिकों, नाविकों तथा ऑटो चालकों ने पूरी तरह से अपने काम बंद रखे। सुबह के समय जो इक्का-दुक्का राशन, चाय और दूध की दुकानें खुली भी थीं, वे भी बाद में बंद हो गईं। नतीजतन, आमतौर पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल और जयकारों से गूंजने वाले ओंकारेश्वर के गलियारे सन्नाटे में डूब गए।
प्रसाद और फूल तक को तरसे श्रद्धालु
ओंकारेश्वर में सामान्य दिनों में रोजाना करीब 35 से 40 हजार श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। अचानक हुए इस बंद से यात्रियों को बस स्टैंड से मंदिर तक पहुंचने, ठहरने और भोजन-पानी की व्यवस्था में भारी किल्लत झेलनी पड़ी।
फूल-प्रसाद नहीं मिला: दुकानें बंद होने के कारण श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर को चढ़ाने के लिए बेलपत्र, फूल और प्रसाद तक नहीं खरीद सके।
यात्रियों की जुबानी: दिल्ली से पहली बार ओंकारेश्वर पहुंचे आकाश गर्ग ने बताया, "प्रसाद की दुकानें बंद होने से हमें खाली हाथ मंदिर जाना पड़ा। सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर जल्द इसका रास्ता निकालना चाहिए।"
दिल्ली की ही यात्री साईं दीपा ने कहा कि तीर्थक्षेत्र में ऐसा माहौल देखकर निराशा हुई। प्रशासन को स्थानीय लोगों के हक का ख्याल रखने के साथ-साथ दूर से आने वाले श्रद्धालुओं की सहूलियत का भी ध्यान रखना चाहिए।
दुकाने बंद होने से परेशान हुए श्रद्धालु19 में से 18 मांगों पर बनी बात, पर विस्थापन पर फंसा पेच
स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि वे किसी भी कीमत पर डूकिया क्षेत्र में विस्थापित होने को तैयार नहीं हैं। वे चाहते हैं कि प्रशासन ऐसा मास्टर प्लान तैयार करे, जिससे उनके पुश्तैनी आशियाने और रोजगार सुरक्षित रहें। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नागरिकों की 19 प्रमुख मांगों में से 18 बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है। हालांकि, सबसे मुख्य मुद्दे—'विस्थापन'—पर अब भी गतिरोध कायम है।
प्रशासन का रुख: कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने बताया कि स्थानीय समिति के अधिकांश बिंदुओं पर सहमति दर्ज कर ली गई है। डूकिया में पुनर्वास के मुद्दे पर भी जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए एक 'बीच का रास्ता' निकालने के संकेत दिए गए हैं।
प्रशासन ने कराई पेयजल की व्यवस्था
हड़ताल के दौरान श्रद्धालुओं को थोड़ी राहत देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन की ओर से नगर में जगह-जगह ठंडे आरओ (RO) पानी के टैंकर और केंद्र स्थापित किए गए थे। फिलहाल, पूरी तीर्थनगरी की नजरें प्रशासन और नागरिक परिषद के बीच होने वाली अगले दौर की वार्ता पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि सिंहस्थ की भव्य तैयारियों और आम जनता के हक के बीच संतुलन कैसे कायम होता है।