Mahasamund News: जिले में राजस्व पटवारी संघ ने 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। पटवारी खरीफ फसल वर्ष 2026-27 की गिरदावरी PV ऐप के माध्यम से कराए जाने का विरोध कर रहे हैं। संघ का कहना है कि ऐप में तकनीकी खामियों और पुराने नक्शों के कारण फसल गिरदावरी का काम पूरा करने में दिक्कतें आ रही हैं। इसके अलावा पटवारियों ने लंबित पदोन्नति प्रक्रिया और वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग भी उठाई है। इस आंदोलन से राजस्व सेवाओं और किसानों की धान खरीदी से जुड़ी प्रक्रियाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
PV ऐप में तकनीकी खामियों का आरोप
पटवारी संघ के मुताबिक, खरीफ फसल गिरदावरी 2026-27 के लिए इस्तेमाल किए जा रहे डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) के नक्शे करीब तीन साल पुराने हैं। संघ का दावा है कि खेतों के नक्शों का विभाजन भी ऑनलाइन रिकॉर्ड में पूरी तरह अपडेट नहीं हुआ है। ऐसे में मौके पर खेतों और खसरों की सही पहचान करने में परेशानी हो रही है।
पटवारियों ने खेतों की मौजूदा स्थिति को भी बड़ी चुनौती बताया है। कई जगह धान की फसल खड़ी है और खेतों में पानी भरा हुआ है। ऐसी परिस्थितियों में प्रत्येक खेत के चारों ओर जाकर PV ऐप के माध्यम से फोटो लेना मुश्किल हो रहा है। संघ का कहना है कि कई गांवों में हजारों खसरों की गिरदावरी का काम बाकी है, जिसे सीमित समय में पूरा करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।
संघ के अनुसार, इन तकनीकी और मैदानी समस्याओं के कारण निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा करने में परेशानी आई है। इसी मामले में विभाग की ओर से कुछ पटवारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई किए जाने की बात भी सामने आई है। इस कार्रवाई को लेकर संबंधित पटवारियों की प्रतिक्रिया और प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
पदोन्नति और वेतन विसंगति दूर करने की मांग
पटवारी संघ का विरोध केवल PV ऐप तक सीमित नहीं है। पटवारी संघ ने लंबित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने और वेतन विसंगतियों का निराकरण करने की मांग की है। संघ चाहता है कि राजस्व निरीक्षक के रिक्त पदों को पटवारियों की पदोन्नति से भरा जाए और पदोन्नति के लिए समय-सीमा तय की जाए। इसके साथ ही अलग-अलग भर्ती बैचों के पटवारियों के वेतन निर्धारण में अंतर की जांच कर उचित समाधान करने की मांग भी उठाई गई है।
संघ ने 12 अक्टूबर को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर PV ऐप की समस्याओं का समाधान करने, पटवारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर पुनर्विचार करने और लंबित मांगों पर निर्णय लेने का अनुरोध किया था। संघ ने चेतावनी दी कि मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर है।
हड़ताल से किसानों को क्या परेशानी हो सकती है?
पटवारियों की हड़ताल का सबसे महत्वपूर्ण असर फसल गिरदावरी और धान खरीदी से जुड़ी प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। फसल गिरदावरी के दौरान खेतों में बोई गई फसल और संबंधित राजस्व रिकॉर्ड की जानकारी दर्ज की जाती है। यह जानकारी किसानों के पंजीयन और समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यदि गिरदावरी का काम समय पर पूरा नहीं होता या रिकॉर्ड में गड़बड़ी रहती है, तो किसानों को पंजीयन अथवा धान बेचने के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था और गिरदावरी का काम कितना प्रभावित होता है, इस पर निर्भर करेगा।
इसके अलावा हड़ताल लंबी चलने पर जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र जैसे राजस्व विभाग से जुड़े काम भी प्रभावित हो सकते हैं। इन प्रमाण पत्रों की जरूरत विद्यार्थियों, नौकरी के अभ्यर्थियों और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों को पड़ती है। ऐसे में आंदोलन का असर केवल किसानों तक सीमित रहने के बजाय आम लोगों की राजस्व संबंधी सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
प्रशासन और पटवारी संघ के बीच समाधान पर नजर
राजस्व पटवारी संघ PV ऐप के बजाय मैनुअली काम शुरू करने, गिरदावरी की व्यवस्था में बदलाव करने और लंबित सेवा संबंधी मांगों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है। वहीं, इस विवाद के बीच किसानों की फसल गिरदावरी और धान खरीदी से जुड़ी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
अब सबकी नजर प्रशासन और पटवारी संघ के बीच होने वाली बातचीत तथा आगे की कार्रवाई पर है। यदि जल्द समाधान नहीं निकलता है, तो राजस्व सेवाओं के साथ-साथ फसल गिरदावरी के काम में भी देरी की आशंका बनी रह सकती है। किसानों के हित में जरूरी होगा कि तकनीकी समस्याओं का समाधान करते हुए गिरदावरी और धान खरीदी से जुड़ी प्रक्रियाएं प्रभावित न हों।






