Balodabazar News: छत्तीसगढ़ में राजस्व पटवारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल को अब राज्य कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ का भी समर्थन मिल गया है। पीवी एप के विरोध के साथ वेतन विसंगति और पदोन्नति जैसी लंबित मांगों को लेकर 13 अक्टूबर से आंदोलन कर रहे पटवारियों के समर्थन में तहसीलदार भी सामने आए हैं। सोमवार को कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के प्रांताध्यक्ष पेखन टोण्डे अपने साथियों के साथ बलौदाबाजार के दशहरा मैदान स्थित धरनास्थल पहुंचे और पटवारियों की मांगों को जायज बताते हुए शासन से जल्द समाधान की मांग की।
'पटवारियों की मांगें तत्काल पूरी कर सकती है सरकार'
धरनास्थल पर पटवारी संघ को संबोधित करते हुए पेखन टोण्डे ने कहा कि पटवारियों की मांगों का निराकरण कोई बड़ी समस्या नहीं है। शासन चाहे तो वेतन विसंगति दूर करने और पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने जैसे विषयों पर तत्काल निर्णय ले सकता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस मामले में कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ से राय मांगती है, तो उनका संगठन भी पटवारियों की मांगों का समर्थन करेगा। टोण्डे ने गिरदावरी कार्य का जिक्र करते हुए कहा कि यह राजस्व विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिसे पूरी ईमानदारी के साथ निभाया जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पटवारियों की समस्याओं पर संवेदनशीलता से विचार करते हुए जल्द उचित निर्णय लेंगे।
'पटवारियों का नहीं, किसानों का भी आंदोलन'
पेखन टोण्डे ने कहा कि पटवारियों की हड़ताल का असर केवल राजस्व कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे किसानों से जुड़े कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं का जल्द समाधान जरूरी है। उन्होंने इस आंदोलन को किसानों के हितों से जुड़ा विषय बताते हुए शासन से सकारात्मक पहल करने की अपील की।
मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान
वहीं, पटवारी संघ के संरक्षक कृष्ण कुमार मिरी ने कहा कि पीवी एप में पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है, लेकिन संघ की कई पुरानी मांगें अब भी लंबित हैं। इनमें वेतन विसंगति दूर करने और पदोन्नति से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। मिरी ने स्पष्ट किया कि जब तक इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की ओर से मिले समर्थन के लिए आभार जताया। पटवारियों की हड़ताल को तहसीलदारों का समर्थन मिलने से आंदोलन को नई मजबूती मिली है। अब सभी की नजरें शासन की अगली पहल और लंबित मांगों पर होने वाले निर्णय पर टिकी हैं।






