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मुठभेड में 27 लोगों की मौत
मुठभेड में 27 लोगों की मौत

POK सुलग उठा : JAAC पर बैन के बाद रावलकोट में भीषण खूनी संघर्ष, 4 पुलिसकर्मियों समेत 27 की मौत

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में हाल के दिनों में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा देखने को मिली है। रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पों में मौतों और घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

कीर्तिमान न्यूज
09 Jun 2026, 11:00 AM
मुजफ्फराबाद

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में हालात बेकाबू हो चुके हैं। अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भड़की गुस्से की चिंगारी ने अब एक भीषण हिंसक रूप ले लिया है। रावलकोट में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई सीधी मुठभेड में अब तक करीब 27 लोगों की मौत होने का सनसनीखेज दावा किया जा रहा है, जबकि 70 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इस खूनी झड़प में 4 पुलिसकर्मियों के भी मारे जाने की पुष्टि हुई है, जिसके बाद पूरे इलाके में सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।

कैसे शुरू हुआ मौत का यह तांडव?

यह पूरी हिंसा उस समय भड़की जब मंगलवार, 9 जून को POK में पूर्ण बंद (Shutterdown Strike) का आह्वान किया गया था। लेकिन इस बंद से ठीक पहले ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई।

  • अस्पताल के बाहर तनाव: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले JAAC के एक सक्रिय कार्यकर्ता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

  • भीड़ का फूटा गुस्सा: आक्रोशित JAAC समर्थक भारी संख्या में अस्पताल की मोर्चरी (शवगृह) के बाहर इकट्ठा हो गए और नारेबाजी करने लगे।

  • बेअसर रही पुलिस की कोशिश: पुलिस प्रशासन ने भीड़ को तितर-बितर करने और समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। देखते ही देखते बहस ने हिंसक झड़प का रूप ले लिया।

दावों में उलझा मौत का आंकड़ा

घटना के बाद से ही रावलकोट और आसपास के इलाकों में असमंजस और दहशत का माहौल है। मौत के आंकड़ों को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं:

पक्षहताहतों का विवरण
आधिकारिक पुलिसिया दावाउपद्रवियों की गोलीबारी में 4 पुलिसकर्मी और 1 राहगीर की मौत। जवाबी कार्रवाई में 6 प्रदर्शनकारी मारे गए।
स्थानीय व स्वतंत्र मीडिया दावाहिंसा की इस आग में अब तक करीब 27 लोगों की जान जा चुकी है और अस्पतालों में घायलों की कतार लगी है।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण है कि कई इलाकों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं को आंशिक रूप से बंद कर दिया गया है ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है।

आखिर क्यों जल रहा है POK?

इस अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन और गुस्से के पीछे POK की राजनीति में किया गया एक बड़ा फेरबदल है।

  1. आरक्षित सीटों पर घमासान: POK की 12 विधानसभा सीटों को लेकर हाल ही में एक विवादित फैसला लिया गया। सरकार ने दावा किया कि ये सीटें उन शरणार्थियों (Refugees) के लिए आरक्षित की गई हैं, जो कश्मीर से जुड़े होने का दावा करते हैं लेकिन फिलहाल पाकिस्तान के अन्य प्रांतों (जैसे पंजाब या सिंध) में रह रहे हैं।

  2. JAAC का गंभीर आरोप: जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। उनका आरोप है कि यह POK के मूल निवासियों के हक पर डाका है और इसके जरिए बाहरी लोगों को यहाँ की राजनीति में थोपा जा रहा है।

  3. हकों की लड़ाई: इसके अलावा बिजली के बढ़े हुए बिलों, आटे पर सब्सिडी खत्म होने और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर भी JAAC लंबे समय से आंदोलन चला रहा था, जिसे दबाने के लिए सरकार ने संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया।

बारूद के ढेर पर रावलकोट

फिलहाल POK के रावलकोट, मुजफ्फराबाद और अन्य प्रमुख शहरों में सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन यह सन्नाटा किसी बड़े तूफान के आने से पहले की खामोशी जैसा है। बाजारों में ताले लटके हैं, सड़कें सुनसान हैं और जगह-जगह सुरक्षाबलों के बख्तरबंद वाहन गश्त कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों ने दोनों पक्षों से शांति की अपील की है, लेकिन स्थानीय जनता का गुस्सा थमता नजर नहीं आ रहा है।

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