तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। राज्य के सबसे चर्चित और फायरब्रांड नेताओं में शुमार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के अगले कदम को लेकर कयासों का बाजार बेहद गर्म है। हाल ही में दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष के साथ अन्नामलाई की हुई हाई-प्रोफाइल बैठक ने राज्य से लेकर केंद्र तक के राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है।
माना जा रहा है कि इस बंद कमरे की बैठक में तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, आगामी रणनीतियों और खुद अन्नामलाई की पार्टी के भीतर भूमिका को लेकर बेहद गंभीर चर्चा हुई है।
'कृपया इंतजार करें, 2 दिन में बात करेंगे'
इस मुलाकात के बाद जब मीडिया ने अन्नामलाई को घेरा, तो उन्होंने कोई साफ इनकार या इकरार करने के बजाय सिर्फ इतना कहा:
"कृपया थोड़ा इंतजार करें। हम अगले दो दिनों में बैठकर विस्तार से बात करेंगे।"
अन्नामलाई के इस रहस्यमयी बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सब कुछ सामान्य होता, तो वह पार्टी छोड़ने या नई पार्टी बनाने की खबरों को सीधे खारिज कर देते। लेकिन "दो दिन" का समय मांगकर उन्होंने साफ कर दिया है कि परदे के पीछे कुछ बड़ा पक रहा है।
क्या हैं अन्नामलाई के सामने विकल्प?
अन्नामलाई के अगले कदम को लेकर इस वक्त राजनीतिक हलकों में दो मुख्य थ्योरी पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है:
1. नई क्षेत्रीय पार्टी का गठन या बीजेपी से विदाई?
पिछले कुछ समय से यह बात सामने आ रही है कि अन्नामलाई तमिलनाडु की राजनीति और वहां पार्टी को आगे बढ़ाने के तौर-तरीकों को लेकर दिल्ली आलाकमान से कुछ अलग सोच रखते हैं। राज्य में उनकी अपनी एक मजबूत फैन फॉलोइंग और लोकप्रियता है, खासकर युवाओं के बीच. इसी को देखते हुए अटकलें हैं कि वह बीजेपी का दामन छोड़कर तमिलनाडु की क्षेत्रीय अस्मिता को भुनाने के लिए एक नए राजनीतिक दल की शुरुआत कर सकते हैं।
2. डैमेज कंट्रोल: क्या राज्यसभा जाएगी 'फायरब्रांड' नेता की गाड़ी?
बीजेपी आलाकमान अच्छी तरह जानता है कि तमिलनाडु जैसे द्रविड़ राजनीति के गढ़ में अन्नामलाई ने पार्टी को एक नई आक्रामकता और पहचान दी है। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें रोकने और नाराजगी दूर करने के लिए बीजेपी उन्हें राज्यसभा सीट का ऑफर दे सकती है। केंद्र सरकार में बड़ी जिम्मेदारी देकर उन्हें राज्य की सक्रिय राजनीति से थोड़ा दूर करने या राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा चेहरा बनाने का दांव भी खेला जा सकता है।
बीजेपी का रुख: 'सब कुछ सामान्य है'
हालांकि, बीजेपी की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। आधिकारिक तौर पर पार्टी सूत्रों का कहना है कि बी.एल. संतोष और अन्नामलाई की मुलाकात एक "सामान्य संगठनात्मक चर्चा" थी, जो समय-समय पर होती रहती है. पार्टी के भीतर किसी भी तरह के मतभेद की खबरों को फिलहाल अफवाह बताया जा रहा है।
आगे क्या?
तमिलनाडु की राजनीति में फिलहाल 'वेट एंड वॉच' (इंतजार करो और देखो) की स्थिति बनी हुई है। अन्नामलाई के समर्थक और विरोधी दोनों ही सांसें थामकर उनके अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।
बड़ा सवाल: क्या अन्नामलाई बीजेपी के 'कमल' के साथ ही तमिलनाडु फतह करने की कोशिश जारी रखेंगे, या फिर 'द्रविड़ राजनीति' के नए दौर में अपनी खुद की नई सियासी नाव लॉन्च करेंगे? इसका फैसला अगले 48 घंटों में होने की पूरी उम्मीद है। इतना तो तय है कि उनका जो भी फैसला होगा, वह तमिलनाडु की भावी राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदल कर रख देगा।
