साही का शिकार कर मांस बांटा, 5 आरोपी गिरफ्तार; कोर्ट ने भेजा जेल
महासमुंद के बागबाहरा वन क्षेत्र में साही के अवैध शिकार मामले में वन विभाग ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
कीर्तिमान डेस्क
15 Jul 2026, 05:37 PM
महासमुंद
वन्यजीवों के अवैध शिकार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साही (इंडियन पॉर्कुपाइन) के शिकार के मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। वन विभाग के अनुसार यह कार्रवाई वनमंडलाधिकारी मयंक पाण्डेय के मार्गदर्शन और उपवन मंडलाधिकारी गोविंद सिंह के नेतृत्व में बागबाहरा वन परिक्षेत्र में की गई। विभाग को सूचना मिली थी कि रैताल बीट के आरक्षित वन क्षेत्र में साही का अवैध शिकार किया गया है। सूचना के आधार पर वन अमले ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की।
आरक्षित वन क्षेत्र में मिला शिकार का मामला
जांच के दौरान रैताल बीट के कक्ष क्रमांक 154 में साही के शिकार की पुष्टि हुई। वन विभाग की टीम ने मामले की जांच आगे बढ़ाई तो ग्राम नवाडीह (खम्हरिया) के पांच लोगों की संलिप्तता सामने आई। पूछताछ में पता चला कि आरोपियों ने शिकार किए गए साही के मांस को काटकर आपस में बांट लिया था। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद वन अपराध प्रकरण क्रमांक 22666/05, दिनांक 13 जुलाई 2026 दर्ज किया गया।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई
वन विभाग ने मामले में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 2(16), 9, 39, 50 और 51 के तहत कार्रवाई की है। गिरफ्तार आरोपियों में गिरधारी गोंड, लोकनाथ गोंड, नागेश्वर गोंड, सियाराम राजपूत और नरसिंह कुमार शामिल हैं। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई में डिप्टी रेंजर नवीन शर्मा, वनरक्षक डीलेश्वरी कंवर, नीलकंठ दीवान, वीरेंद्र दीवान सहित वन विभाग के कर्मचारियों की अहम भूमिका रही। वहीं वन प्रबंधन समिति नवाडीह (खम्हरिया) के सदस्यों ने भी अभियान में सहयोग किया। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोग करें और शिकार या तस्करी से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी तुरंत विभाग को दें। विभाग ने कहा है कि वन क्षेत्रों में निगरानी और गश्त अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।