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Mahasamund News: रसोईया संघ की प्रदेश अध्यक्ष समेत 5 महिलाएं थाने में बैठाई गईं, 4 महीने से भुगतान का मुद्दा

Mahasamund News: महासमुंद में चार महीने से भुगतान नहीं मिलने के मुद्दे पर मंत्रालय जाने की तैयारी कर रही रसोईया संघ की प्रदेश अध्यक्ष समेत छह महिलाओं को पुलिस थाने लाई। पुलिस ने कार्रवाई या हिरासत से इनकार किया।

कीर्तिमान रिपोर्टर | नरेंद्र कुमार
प्रकाशित: 29 Sep 2026, 08:46 PM · 5 मिनट पढ़ने का समय
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Mahasamund News: जिले में मध्यान्ह भोजन योजना से जुड़े रसोईया संघ और महिला स्व सहायता समूहों के सदस्यों का बकाया भुगतान का मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है। चार महीने से मानदेय और समूहों के संचालन से जुड़े भुगतान नहीं होने का आरोप लगाते हुए रसोईया संघ की सदस्य अपनी शिकायत लेकर रायपुर स्थित मंत्रालय जाने की तैयारी में थीं। इसी दौरान पुलिस ने रसोईया संघ की प्रदेश अध्यक्ष नीलू ओगरे समेत पाँच महिलाओं को थाने लाकर बैठा दिया।
रसोईया संघ के सदस्यों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी स्पष्ट जानकारी के थाने लाया गया और बाद में बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। हालांकि पुलिस का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई और न ही उन्हें हिरासत में लिया गया। इस दौरान थाने में बाहरी लोगों से उनकी मुलाकात और बातचीत होती रही। बाद में जिला कांग्रेस नेत्री रश्मि चंद्राकर के हस्तक्षेप के बाद महिलाओं को थाने से जाने दिया गया।

मंत्रालय जाने की तैयारी की सूचना पर पुलिस की कार्रवाई

रसोईया संघ से जुड़े सदस्यों के मुताबिक, चार महीने से भुगतान नहीं होने के मामले को लेकर वे अपनी शिकायत शासन तक पहुंचाने के लिए रायपुर मंत्रालय जाने की तैयारी कर रही थीं। इसी बीच पुलिस को इसकी जानकारी मिली और नीलू ओगरे समेत छह महिला सदस्यों को थाने लाया गया। महिलाओं का कहना है कि उन्हें थाने में बैठाए रखने के बावजूद पुलिस की ओर से इसे किसी तरह की कार्रवाई या हिरासत नहीं माना गया। हालांकि, उनका आरोप है कि उन्हें थाने से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। बाद में जिला कांग्रेस नेत्री रश्मि चंद्राकर के हस्तक्षेप के बाद सभी महिलाओं को वहां से जाने दिया गया।

कॉंग्रेस नेत्री रश्मि चंद्राकर के हस्तक्षेप के बाद हुई रिहाई 
रश्मि चंद्राकर बोलीं- रसोईया बहनों की मांग जायज

मामले में जिला कांग्रेस नेत्री रश्मि चंद्राकर ने रसोईया संघ के सदस्यों के समर्थन में कहा कि कांग्रेस रसोईया बहनों की लड़ाई में उनके साथ है और अंतिम दिन तक उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से काम करने के बावजूद यदि उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है तो अपनी मांग को लेकर आवाज उठाना उनका अधिकार है। उन्होंने रसोईया संघ की मांगों को जायज बताते हुए भुगतान जल्द किए जाने की बात कही।

नीलू ओगरे का आरोप- अधिकारियों से मिलने जाते हैं तो पुलिस थाने ले आती है

रसोईया संघ की प्रदेश अध्यक्ष नीलू ओगरे ने आरोप लगाया कि जब भी वह रसोईया संघ से जुड़ी समस्याओं को लेकर अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का प्रयास करती हैं, तब पुलिस उन्हें इसी तरह थाने लेकर बैठा देती है। नीलू ओगरे का कहना है कि बार-बार पुलिस के उनके घर पहुंचने से आसपास के लोगों के बीच भी उनकी छवि प्रभावित हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि रसोईया बहनें लगातार कई महीनों से काम कर रही हैं और उन्हें भुगतान नहीं मिल रहा है, तो क्या अपनी मांग को लेकर आवाज उठाने का भी उन्हें अधिकार नहीं है?

चार महीने से नहीं हुआ है भुगतान 

रसोईया संघ के अनुसार प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था के संचालन में रसोईया और महिला स्व सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। संघ का दावा है कि पिछले चार महीने से रसोईया सदस्यों को उनके मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। वहीं, जिन स्व सहायता समूहों के माध्यम से मध्यान्ह भोजन के लिए राशन और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की जाती है, उन्हें भी भुगतान नहीं मिलने की बात कही जा रही है। समूह संचालकों के मुताबिक, भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें उधार लेकर स्कूलों के लिए राशन की व्यवस्था करनी पड़ रही है। अब स्थिति यह हो गई है कि लंबे समय से कर्ज बढ़ने के कारण कुछ दुकानदारों ने भी आगे उधार देने से मना करना शुरू कर दिया है।

11 सितंबर को राशि जारी होने के बाद भी भुगतान का इंतजार

रसोईया संघ का कहना है कि उनके भुगतान के लिए लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से 11 सितंबर को राशि जारी की जा चुकी है। इसके बावजूद महासमुंद जिले में संबंधित रसोईया और समूह संचालकों को भुगतान नहीं किया गया है। संघ का दावा है कि छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। जांजगीर-चांपा और आरंग ब्लॉक में भुगतान होने का उदाहरण देते हुए महासमुंद में भी जल्द भुगतान किए जाने की मांग की जा रही है। हालांकि, भुगतान में देरी के स्थानीय स्तर पर कारण क्या हैं और राशि जारी होने के बाद जिले में भुगतान की प्रक्रिया किस स्तर पर लंबित है, इस पर संबंधित विभाग का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

पुलिस बोली- कोई कार्रवाई या हिरासत नहीं

पुलिस का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है और उन्हें डिटेन या गिरफ्तार नहीं किया गया था। पुलिस के अनुसार, महिलाओं को थाने लाने की स्थिति को कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं, रसोईया संघ के सदस्यों का कहना है कि उन्हें थाने में बैठाकर रखा गया और बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट करने के लिए पुलिस का आधिकारिक विस्तृत पक्ष महत्वपूर्ण होगा।

चार महीने का भुगतान बना आंदोलन की वजह

महासमुंद में रसोईया संघ और महिला स्व सहायता समूहों की मुख्य मांग बकाया भुगतान को लेकर है। संघ का कहना है कि बिना भुगतान के लगातार मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था चलाना मुश्किल हो रहा है। दूसरी ओर, शासन स्तर से राशि जारी होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर भुगतान नहीं होने का मुद्दा अब विरोध और आंदोलन का कारण बनता जा रहा है।
रसोईया संघ ने जल्द भुगतान नहीं होने की स्थिति में अपनी मांगों को लेकर आगे भी आवाज उठाने की बात कही है।
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