Mahasamund News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा और सेवा, सुशासन एवं जनकल्याण के संकल्प से प्रेरित होकर देश में ऐसे प्रयासों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिनसे समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे बढ़ने के अवसर मिलें। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी कौशल विकास, रोजगार और दिव्यांगजन सशक्तिकरण के माध्यम से लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इन्हीं प्रयासों से महासमुंद जिले के ग्राम मामाभांचा निवासी रमेश कुमार कन्नौजे ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को पीछे छोड़कर हुनर को अपनी ताकत बनाया और आज सफल दर्जी के रूप में आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।
हुनर से मिली नई पहचान
जन्म से दोनों पैरों से दिव्यांग रमेश के लिए जीवन की राह आसान नहीं रही। वे अपने पैरों पर खड़े नहीं हो सके, लेकिन उनके हौसलों ने उन्हें कभी हार मानने नहीं दी। आत्मनिर्भर बनने की दृढ़ इच्छा ने उन्हें सिलाई के हुनर से जोड़ा। आज वे अपने घर पर ही छोटा सा सिलाई केंद्र संचालित कर परिवार की जिम्मेदारियों में अपना योगदान दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री कौशल योजना से मिला नया अवसर
रमेश बताते हैं कि वे मोटरयुक्त सिलाई मशीन से ब्लाउज, सूट, स्कूल ड्रेस, पेटीकोट सहित विभिन्न प्रकार के कपड़ों की सिलाई करते हैं। उनके काम की मांग इतनी बढ़ गई है कि कई बार उनके पास आने वाला पूरा काम अकेले कर पाना भी मुश्किल हो जाता है। सिलाई के कार्य से उन्हें प्रतिमाह लगभग 8 से 10 हजार रूपए की आमदनी हो रही है। रमेश के जीवन में बदलाव की शुरुआत तब हुई, जब एक दिन उन्होंने कुछ युवाओं को एक जैसी ड्रेस में जाते देखा। बातचीत करने पर उन्हें जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आत्मनिर्भर बनने की अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए रमेश ने भी प्रशिक्षण प्राप्त करने का निर्णय लिया।
रमेश बताते हैं कि वे मोटरयुक्त सिलाई मशीन से ब्लाउज, सूट, स्कूल ड्रेस, पेटीकोट सहित विभिन्न प्रकार के कपड़ों की सिलाई करते हैं। उनके काम की मांग इतनी बढ़ गई है कि कई बार उनके पास आने वाला पूरा काम अकेले कर पाना भी मुश्किल हो जाता है। सिलाई के कार्य से उन्हें प्रतिमाह लगभग 8 से 10 हजार रूपए की आमदनी हो रही है। रमेश के जीवन में बदलाव की शुरुआत तब हुई, जब एक दिन उन्होंने कुछ युवाओं को एक जैसी ड्रेस में जाते देखा। बातचीत करने पर उन्हें जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आत्मनिर्भर बनने की अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए रमेश ने भी प्रशिक्षण प्राप्त करने का निर्णय लिया।

