निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल : बारिश की पहली ही फुहार में धंसी बिलासपुर-उरगा फोरलेन, घंटों जाम में बिलखते रहे लोग
बिलासपुर के ढेंका गांव के पास बिलासपुर-उरगा फोरलेन परियोजना के तहत बन रहे ओवरब्रिज का एप्रोच रोड पहली ही तेज बारिश में धंस गया। मलबा और मिट्टी NH-49 पर गिरने से रायपुर-रायगढ़ मार्ग घंटों तक बाधित रहा और लंबा जाम लग गया। स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में लापरवाही और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
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कीर्तिमान न्यूज
24 Jul 2026, 08:49 AM
बिलासपुर
ग्राउंड रिपोर्ट मानसून की पहली ही मूसलाधार बारिश ने बिलासपुर में प्रशासनिक दावों और सड़क निर्माण की गुणवत्ता की हवा निकाल दी है। बिलासपुर-उरगा फोरलेन परियोजना के तहत ढेंका गांव के पास बन रहे ओवरब्रिज का एप्रोच रोड अचानक धंस गया। एप्रोच रोड में भरा गया मलबा, मिट्टी और मुरुम बहकर सीधे नेशनल हाईवे-49 पर आ गिरा, जिससे रायपुर-रायगढ़ मार्ग पूरी तरह से ठप हो गया। इस हादसे के कारण हाईवे पर देखते ही देखते कई किलोमीटर लंबा भीषण जाम लग गया।
घंटों से फंसे यात्रियों को रास्ता साफ होने का इंतजार
देर रात से शुरू हुई यह मुसीबत गुरुवार शाम तक बरकरार रही। बसों, एंबुलेंस, निजी कारों और भारी ट्रकों में सवार यात्री घंटों इस आस में फंसे रहे कि कब रास्ता साफ होगा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि घटना होते ही इसकी सूचना नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को दे दी गई थी। इसके बावजूद राहत टीम और अफसर घंटों बाद मौके पर पहुंचे।
समय पर पहुंचता अमला तो नहीं होती परेशानी "अगर समय रहते प्रशासनिक अमला पहुंच जाता, तो सैकड़ों लोगों को बारिश में इस तरह पूरी रात और दिन भर परेशान नहीं होना पड़ता।" — एक राहगीर का छलका दर्द
एनएच पर लगी कतार फिलहाल, जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से हाईवे से मिट्टी और गिट्टी हटाने का काम जारी है, ताकि आवागमन को धीरे-धीरे सामान्य किया जा सके।
क्या घटिया सामग्री बनी हादसे की वजह?
इस घटना ने सीधे तौर पर फोरलेन निर्माण कर रही ठेका कंपनी की कार्यशैली और अधिकारियों की निगरानी पर उंगली उठा दी है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी: ग्रामीणों का आरोप है कि रिटेनिंग वॉल और मिट्टी-मुरुम की भराई में तय मानकों का पालन नहीं किया गया।
भ्रष्टाचार की बू: पहली ही बारिश में एप्रोच रोड का बह जाना साफ इशारा करता है कि निर्माण में भारी लापरवाही और घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ है।
स्थानीय लोगों और राहगीरों ने शासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार ठेकेदार व लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।