प्राकृतिक आपदाएं जब भी आती हैं, अपने पीछे तबाही और बेबसी छोड़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में पीड़ित परिवारों को सबसे ज्यादा जरूरत त्वरित सहायता और सांत्वना की होती है। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में हाल ही में आए भीषण आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली की आपदा के बाद कुछ ऐसा ही देखने को मिला। राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के नियमों के तहत, संकट में फंसे नागरिकों को तुरंत राहत सामग्री और आर्थिक मदद पहुंचाई गई। जान-माल, गंभीर चोट या मकानों के नुकसान की भरपाई के लिए सहायता राशि सीधे प्रभावितों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा रही है।
474 परिवारों को तुरंत बांटी गई राहत राशि
आपदा के तुरंत बाद राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी 6-4) के नियमों के तहत प्रभावित लोगों की सूची तैयार की गई। प्रशासन ने एक विशेष अभियान चलाकर सुकमा जिले के 474 प्रभावित लोगों को कुल 69 लाख 32 हजार 700 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे तौर पर उपलब्ध कराई। इस तूफान का सबसे ज्यादा असर तोंगपाल इलाके में देखने को मिला था। इसलिए प्रशासन ने तोंगपाल के परिवारों को प्राथमिकता दी और वहां करीब 36 लाख रुपये की तात्कालिक सहायता राशि बांटी। मुश्किल की इस घड़ी में मिली इस मदद ने पीड़ित परिवारों को एक बड़ा संबल दिया है।
हर पीड़ित तक पहुंचने की कोशिश
1400 से ज्यादा घरों को पहुंचा नुकसान
इस आंधी-तूफान ने सुकमा जिले में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है, जिससे करीब 1,407 मकानों को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने इन सभी क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे पूरा कर लिया है और अब इनके पुनर्निर्माण व मरम्मत का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है। निजी मकानों के अलावा, तूफान की वजह से बिजली के खंभे, स्कूल या अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को भी भारी नुकसान हुआ है। अनुमान के मुताबिक, करीब 2.5 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है, जिन्हें दोबारा ठीक करने और व्यवस्था बहाल करने की कार्रवाई युद्धस्तर पर जारी है।