Raipur Zila Panchayat Meeting: जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक उस समय गरमा गई, जब जिला पंचायत सदस्य वतन अंगनाथ चंद्राकर ने स्थानीय समस्याओं और विभागीय सुस्ती को लेकर प्रशासन को सीधे आड़े हाथों लिया। सड़कों की खस्ताहाली से लेकर किसानों की समस्याओं तक, वतन ने एक के बाद एक कई जमीनी मुद्दे उठाकर अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। हालात यह रहे कि जनप्रतिनिधि के सीधे सवालों का जवाब देने के बजाय कई विभागों के अफसर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए।
टूटी सड़कें और मरम्मत में लापरवाही
बैठक में पीएमजीएसवाई (PMGSY) और पीडब्ल्यूडी (PWD) की सड़कों की बदहाली का मुद्दा प्रमुखता से उठा। वतन चंद्राकर ने कहा कि सड़कें बनते ही कुछ समय में गड्ढों में तब्दील हो रही हैं, लेकिन न तो निर्माण एजेंसी ध्यान दे रही है और न ही रखरखाव की जिम्मेदारी तय हो रही है। इन गड्ढों की वजह से आए दिन राहगीर और वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने सड़कों की तत्काल मरम्मत कराने और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की बात कही।
किसानों से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सख्त ऐतराज
- धान खरीदी और पंजीयन: संयुक्त खातेदार किसानों के लिए एग्रीटेक पंजीयन की अनिवार्यता का विरोध करते हुए वतन ने कहा कि जटिल कागजी प्रक्रिया से किसान परेशान हो रहे हैं। धान खरीदी से पहले नियमों को व्यावहारिक और आसान बनाया जाना चाहिए।
- फसल बीमा की खामियां: फसल नुकसान के मुआवजे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पूरे जिले को एक इकाई मानकर नुकसान का आकलन करना व्यावहारिक नहीं है। नुकसान का आकलन व्यक्तिगत 'किसान' को इकाई मानकर होना चाहिए। जब किसान के खाते से बीमा का प्रीमियम कट रहा है, तो फसल डूबने या खराब होने पर राहत की राशि उसे क्यों नहीं मिल पा रही?
गौधाम योजना केवल कागजों तक सीमित ?
आवारा मवेशियों से फसलों को हो रहे नुकसान पर चिंता जताते हुए उन्होंने गौधाम योजना की ढिलाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि योजना धरातल पर नजर नहीं आ रही, जिससे किसान दिन-रात अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों में पहरा देने को मजबूर हैं। योजना को तुरंत प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई।फंड मिलने के 7 महीने बाद भी आंगनबाड़ियों के टेंडर अटके
जर्जर आंगनबाड़ियों के जीर्णोद्धार में हो रही देरी पर वतन ने सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने खुलासा किया कि आंगनबाड़ियों की मरम्मत के लिए करीब सात महीने पहले ही बजट जारी हो चुका है, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते अब तक टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। छोटे बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से जुड़ी इस लापरवाही पर उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
शासकीय भूमि आवंटन और स्कूल कमेटियों पर आपत्ति
- जमीन का हस्तांतरण: रायपुर कलेक्टर द्वारा बिना ग्राम पंचायतों की सहमति या प्रस्ताव के शासकीय भूमि को उद्योग विभाग को सौंपने और उद्योगपतियों को आवंटित करने की प्रक्रिया पर उन्होंने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
- स्कूल प्रबंधन कमेटी: केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पुरानी कमेटियों को भंग न करने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि कमेटियों को तुरंत पुनर्गठित कर बच्चों के पालकों को ही अध्यक्ष और संचालक मंडल में शामिल किया जाए।
