राम मंदिर घोटाला : रिश्तेदारों के खातों से होता था मनी लॉन्ड्रिंग का खेल, SIT की रडार पर कई रसूखदार
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने चोरी की रकम को छिपाने के लिए रिश्तेदारों और करीबियों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया। मामले में मंदिर के अंदरूनी लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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कीर्तिमान न्यूज
09 Jul 2026, 10:55 AM
अयोध्या
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला अब महज एक साधारण चोरी नहीं, बल्कि एक सोचे-समझे वित्तीय नेटवर्क (फाइनेंशियल नेक्सस) की ओर इशारा कर रहा है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की पड़ताल में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में एसआईटी ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर आठ मुख्य आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच एजेंसियों की कड़ी पूछताछ में यह बात सामने आई है कि चोरी की गई मोटी रकम को ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने बकायदा 'मनी लॉन्ड्रिंग' जैसा पैंतरा आजमाया था।
रिश्तेदारों के खातों में करते थे ट्रांसफर
पूछताछ के दौरान तीन प्रमुख आरोपियों ने इस पूरे खेल के तौर-तरीकों (मोडस ऑपरेंडी) से पर्दा उठाया है। आरोपियों ने कुबूल किया कि मंदिर परिसर से चुराई गई रकम को वे सीधे अपने बैंक खातों में जमा नहीं करते थे। पकड़े जाने के डर से और पैसों का असली सोर्स (स्रोत) छिपाने के लिए, वे इस रकम को पहले अपने करीबियों और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर करते थे। इसके कुछ समय बाद, उसी पैसे को घुमाकर वापस अपने निजी खातों में मंगवा लिया जाता था, ताकि बैंकिंग ट्रांजैक्शन देखने पर किसी को शक न हो।
राम मंदिर मामला मंदिर के अंदर से मिलती थी मदद
हालांकि, टेक-सर्विलांस और बैंक स्टेटमेंट खंगाल रही जांच एजेंसियों ने इस चालाकी को पकड़ लिया है। जांच में यह भी साफ हुआ है कि मंदिर के भीतर सुरक्षा और कड़ी निगरानी के बावजूद इतनी बड़ी रकम बाहर निकालना किसी बाहरी व्यक्ति के बस की बात नहीं थी। आरोपियों ने स्वीकारा है कि उन्हें इस काले कारनामे में मंदिर के अंदर से ही मदद मिल रही थी। पूछताछ में 'टिन्नू यादव' और मंदिर के 'गणना प्रभारी' (कैश काउंटिंग इन-चार्ज) का नाम सामने आया है।
नकदी और जेवरात भी किए गए बरामद
दावा है कि इन्हीं दोनों की मिलीभगत से चढ़ावे की रकम को बेहद सुरक्षित तरीके से परिसर से बाहर भेजा जाता था। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां आज आरोपियों की निशानदेही पर भारी मात्रा में नकदी और चोरी गए जेवरात बरामद कर सकती हैं। इस पूरे विवाद की जड़ें मंदिर के प्रशासनिक ढांचे से भी जुड़ी नजर आ रही हैं। जांच में यह बेहद संवेदनशील खुलासा हुआ है कि ट्रस्ट में तैनात कई कर्मचारियों की भर्ती नियमों को ताक पर रखकर, बड़े पदाधिकारियों की सीधी सिफारिश पर की गई थी।
ट्रस्ट के पदों से इस्तीफा
इस सिफारिशी लिस्ट में सबसे प्रमुख नाम ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा का सामने आ रहा है। गौरतलब है कि चढ़ावा चोरी का यह बड़ा विवाद सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और महासचिव चंपत राय ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल, जांच एजेंसियां बैकडोर एंट्री पाए इन कर्मचारियों के पिछले रिकॉर्ड और उनके रसूखदारों से कनेक्शन की सघनता से जांच कर रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर कानून का शिकंजा कस सकता है।