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एग्जाम छूटने पर रोते पिता।
एग्जाम छूटने पर रोते पिता।
मनोरंजन

Re-NEET : कुछ मिनट की देरी ने छीन  लिया रागिनी  का सपना, परीक्षा केंद्र के बाहर फूट-फूटकर रोए पिता 

मध्य प्रदेश के विदिशा में आयोजित Re-NEET परीक्षा के दौरान एक छात्रा कुछ मिनट की देरी से परीक्षा केंद्र पहुंची, जिसके कारण उसे प्रवेश नहीं मिला। रास्ते में बाइक पंक्चर होने और बारिश की वजह से वह समय पर नहीं पहुंच सकी। परीक्षा छूटने से आहत पिता केंद्र के बाहर रो पड़े, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 22 Jun 2026, 03:48 PM · अपडेट: 07 Oct 2026, 06:29 PM
मध्यप्रदेश
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

मध्य प्रदेश के विदिशा में आयोजित Re-NEET परीक्षा के दौरान एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने परीक्षा व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। परीक्षा केंद्र के बाहर एक छात्रा और उसके पिता की बेबसी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि छात्रा निर्धारित समय से कुछ मिनट देर से केंद्र पहुंची, जिसके चलते उसे परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली। जानकारी के अनुसार, 21 जून 2026 को आयोजित Re-NEET परीक्षा देने के लिए छात्रा रागिनी विश्वकर्मा अपने पिता के साथ विदिशा के गर्ल्स कॉलेज परीक्षा केंद्र जा रही थीं। इसी दौरान रास्ते में उनकी बाइक पंक्चर हो गई। खराब मौसम और बारिश ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया। तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके।

पिता ने व्यवस्था पर उठाए सवाल

घटना के बाद पिता ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि जब परीक्षा से जुड़ी बड़ी गड़बड़ियां सामने आती हैं, तब व्यवस्थाओं में सुधार की बात होती है, लेकिन किसी छात्र की वास्तविक परेशानी को लेकर कोई राहत नहीं दी जाती। उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ मिनट की देरी के कारण पूरे साल की मेहनत पर पानी फिर जाना क्या उचित है। देश की सबसे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में शामिल NEET के लिए लाखों छात्र लंबे समय तक तैयारी करते हैं। कई परिवार आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद बच्चों को बेहतर अवसर दिलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में परीक्षा के दिन सामने आने वाली अप्रत्याशित परिस्थितियां छात्रों और अभिभावकों के लिए बेहद तनावपूर्ण साबित हो सकती हैं।

नियम बनाम मानवीय दृष्टिकोण

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की ओर से परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश को लेकर स्पष्ट और सख्त नियम निर्धारित किए गए हैं। तय समय के बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाता। हालांकि इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि दुर्घटना, खराब मौसम, वाहन खराब होने या अन्य अपरिहार्य परिस्थितियों में क्या किसी विशेष व्यवस्था की संभावना नहीं होनी चाहिए। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार आ रही हैं। कुछ लोग परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए नियमों को जरूरी बता रहे हैं, जबकि कई लोग मानवीय आधार पर विशेष परिस्थितियों में राहत देने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल यह मामला परीक्षा प्रणाली में नियमों और संवेदनशीलता के बीच संतुलन को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

बड़ा सवाल

विदिशा की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षाओं में ऐसी परिस्थितियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। नियम अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन क्या असाधारण परिस्थितियों में मानवीय दृष्टिकोण के लिए भी कोई स्थान होना चाहिए, यही सवाल अब चर्चा के केंद्र में है। जानकारी के मुताबिक छात्रा रागिनी विश्वकर्मा अपने पिता के साथ परीक्षा देने जा रही थीं। रास्ते में उनकी बाइक खराब हो गई। इसी बीच बारिश शुरू हो गई, जिससे परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में और देरी हो गई। जब तक वे विदिशा के गर्ल्स कॉलेज स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचे, तब तक प्रवेश का समय समाप्त हो चुका था। 

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