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भारत-कनाडा रिश्तों में फिर बढ़ा तनाव
भारत-कनाडा रिश्तों में फिर बढ़ा तनाव
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संबंध : भारत-कनाडा रिश्तों में फिर तनाव, भारतीय दूत ने आरोपों को बताया झूठा

भारत-कनाडा व्यापार समझौते की बातचीत के बीच खालिस्तान और निज्जर हत्या मामला फिर चर्चा में है। भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश पटनायक ने भारत सरकार पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे दावे वास्तविकता पर आधारित नहीं हैं। दूसरी ओर दोनों देश व्यापार समझौते और द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

कीर्तिमान नेटवर्क
27 May 2026, 01:23 PM
नई दिल्ली
भारत और कनाडा के रिश्तों में लंबे समय बाद सुधार की कोशिशें तेज हुई हैं, लेकिन इसी बीच खालिस्तान और निज्जर हत्या मामले से जुड़ा विवाद फिर सामने आ गया है। कनाडा में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश पटनायक ने कनाडाई खुफिया एजेंसी कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा पर गंभीर सवाल उठाए हैं और कहा है कि भारत सरकार को कनाडाई नागरिकों के खिलाफ अपराधों से जोड़ने वाले दावे वास्तविकता पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दे वास्तविक हो सकते हैं, लेकिन कई दावे काल्पनिक और राजनीतिक रूप से प्रभावित दिखाई देते हैं।

भारतीय दूत ने CSIS पर उठाए सवाल

दिनेश पटनायक ने एक इंटरव्यू में कहा कि कनाडा की सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था पर खालिस्तानी समूहों का प्रभाव दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ खालिस्तानी तत्वों ने कनाडाई खुफिया अधिकारियों को प्रभावित कर भारत के खिलाफ झूठे दावे फैलाने की कोशिश की है। पटनायक ने यह भी कहा कि यदि कनाडा के पास भारत सरकार की संलिप्तता को लेकर कोई ठोस सबूत है, तो उसे अदालत में साबित किया जाना चाहिए।

निज्जर हत्या मामले से बिगड़े संबंध

भारत-कनाडा संबंधों में तनाव 2023 में खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद बढ़ा था। कनाडा ने इस मामले में भारत पर संलिप्तता के आरोप लगाए थे, जबकि भारत ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया। इसी विवाद के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्ते काफी कमजोर हो गए थे और व्यापार वार्ताएं भी प्रभावित हुई थीं।

व्यापार समझौते के बीच विवाद

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारत और कनाडा फिर से आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 25 से 27 मई 2026 तक कनाडा दौरे पर हैं और उनके साथ करीब 150 भारतीय उद्योग प्रतिनिधियों का दल भी गया है। इस दौरे का मकसद व्यापार और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाना है। दोनों देश 2026 के अंत तक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और कनाडा द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रख रहे हैं।

मार्क कार्नी रिश्ते सुधारने की कोशिश 

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत के साथ संबंधों को नए सिरे से आगे बढ़ाने की कोशिश की है। मार्च 2026 में भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी CEPA को इस साल पूरा करने पर सहमति जताई थी। कनाडा सरकार ने भी कहा था कि भारत-कनाडा साझेदारी में व्यापार, ऊर्जा, कृषि और तकनीक जैसे क्षेत्रों में बड़ी संभावनाएं हैं।

खालिस्तान मुद्दा कूटनीतिक चुनौती

भारत लंबे समय से कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी संगठनों को लेकर चिंता जताता रहा है। नई दिल्ली का कहना है कि कनाडा को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर भारत-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। वहीं कनाडा में कुछ सिख संगठनों और राजनीतिक समूहों का कहना है कि वे मानवाधिकार और राजनीतिक अभिव्यक्ति के अधिकार के तहत अपनी बात रखते हैं। इसी टकराव ने दोनों देशों के रिश्तों को बार-बार प्रभावित किया है।

रिश्तों में संतुलन जरूरी

भारत और कनाडा के बीच आर्थिक रिश्तों में बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे बार-बार बाधा बन रहे हैं। यदि दोनों देश व्यापार समझौते को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें खालिस्तान, सुरक्षा आरोपों और कूटनीतिक भरोसे से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट संवाद करना होगा। फिलहाल भारत की ओर से साफ संदेश दिया गया है कि आरोपों की जगह ठोस सबूत रखे जाएं। वहीं कनाडा की नई सरकार आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ाने के मूड में दिख रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि व्यापार समझौता दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देता है या खालिस्तान विवाद फिर से भरोसे की राह में बाधा बनता है।
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