भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में जब भी ऐसे खिलाड़ी की बात होगी जो अकेले दम पर मैच का पासा पलट दे, तो विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत का नाम सबसे ऊपर आएगा। 50 से अधिक टेस्ट मैचों के अनुभव और 8 शतकों के साथ पंत ने खुद को अपनी पीढ़ी के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में स्थापित कर लिया है। उनका निडर और आक्रामक रवैया भारत की सबसे बड़ी ताकत रहा है, जो चंद सत्रों में विरोधी टीम से मैच छीन लेता है।
लेकिन, क्या यही आक्रामकता अब उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बनती जा रही है? अफगानिस्तान के खिलाफ हाल ही में संपन्न हुए एकमात्र टेस्ट मैच के बाद यह बहस एक बार फिर गरमा गई है।
अफ़गानिस्तान के खिलाफ 'वही पुरानी गलती'
अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच में भारत बेहद मजबूत स्थिति में था, इसलिए ऋषभ पंत के 81 रन पर आउट होने से मैच के नतीजे पर तो कोई खास असर नहीं पड़ा, लेकिन उनके आउट होने के तरीके ने पूर्व दिग्गजों को निराश जरूर किया। पंत एक बार फिर 80 के स्कोर पार करने के बाद एक गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेलकर पवेलियन लौट गए।
इस पारी ने उनके करियर के उस अनचाहे पैटर्न को फिर से उजागर कर दिया है, जहाँ वे व्यक्तिगत मील के पत्थरों (शतकों) की परवाह किए बिना जोखिम भरा शॉट खेलकर अपना विकेट गंवा देते हैं।
ऐसा शॉट हैरान करने वाला है...
पंत के इस रवैये पर भारत के सबसे अनुभवी स्पिनर और उनके पूर्व साथी खिलाड़ी रविचंद्रन अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अश्विन ने पंत की प्रतिभा की सराहना तो की, लेकिन 80 और 90 के फेर में बार-बार आउट होने पर गहरी निराशा व्यक्त की।
अश्विन ने खुलकर कहा:
"आप 80 और 90 के स्कोर पर कई बार आउट हुए हैं। ऐसा महान टेस्ट बल्लेबाज मिलना नामुमकिन है। लेकिन 80 रन पर पहुंचने के बाद ऐसा शॉट खेलना वाकई हैरान करने वाला है। क्या आप 20 रन और संभलकर नहीं खेल सकते? उन्होंने गलत समय पर अजीबोगरीब शॉट खेलकर कई बार भारत को नुकसान पहुंचाया है।"
अश्विन ने आगे आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अगर पंत ने अपने इन 80 और 90 रन के स्कोर्स को शतकों में बदला होता, तो आज उनके टेस्ट आंकड़े अविश्वसनीय और दुनिया के महानतम बल्लेबाजों के समकक्ष होते।
स्वाभाविक खेल बनाम जिम्मेदारी
अश्विन का मानना है कि पंत अब करियर के उस मुकाम पर हैं जहाँ सिर्फ 'स्वाभाविक प्रतिभा' (Natural Talent) का बहाना नहीं चल सकता। उन्होंने पंत को अतिरिक्त जिम्मेदारी लेने की सलाह दी है।
अश्विन के बयान के मुख्य बिंदु:
गलतियों का दोहराव: सभी बल्लेबाज गलतियाँ करते हैं, लेकिन पंत का बार-बार एक ही गलती को दोहराना निराशाजनक है।
सलाह की अनदेखी: जब कई सीनियर और कोचों ने उन्हें बताया है कि यह गलत शॉट सिलेक्शन है, तो फिर से वही गलती करना स्वीकार्य नहीं है।
अनुभव का तकाजा: पंत अब 50 से अधिक टेस्ट खेल चुके हैं। इस स्तर पर उन्हें मैच की परिस्थिति और समय के अनुसार खुद को ढालना सीखना होगा।
क्या कहता है पंत का नजरिया?
ऋषभ पंत का क्रिकेट दर्शन हमेशा से 'टीम फर्स्ट' और 'फियरलेस क्रिकेट' का रहा है। वे कई बार कह चुके हैं कि उन्हें अपने पर्सनल रिकॉर्ड्स या शतकों से फर्क नहीं पड़ता, वे बस टीम को तेज गति से आगे ले जाना चाहते हैं। इसी सोच ने उन्हें गाबा (ऑस्ट्रेलिया) और इंग्लैंड में ऐतिहासिक जीत दिलाई हैं।
क्रिकेट पंडितों का विश्लेषण: हालांकि पंत की इस शैली ने भारत को असफलता से ज्यादा सफलताएं दिलाई हैं, लेकिन अश्विन जैसे दिग्गजों की चिंता भी जायज है। एक स्थापित सीनियर खिलाड़ी के रूप में, पंत का क्रीज पर टिके रहना भारतीय मिडिल ऑर्डर को वो मजबूती दे सकता है जिसकी जरूरत विदेशी पिचों पर अक्सर पड़ती है।
अब देखना यह होगा कि क्या पंत इस आलोचना से सीख लेकर अपनी आक्रामकता में थोड़ी समझदारी का तड़का लगाते हैं, या फिर अपने इसी 'क्रेजी और एंटरटेनिंग' अंदाज से प्रशंसकों का दिल जीतना जारी रखते हैं।
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