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टीम इंडिया का फिटनेस टेस्ट
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टीम इंडिया में जगह चाहिए तो फिटनेस जरूरी, BCCI ने कड़े किए मानक

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के लिए BCCI ने फिटनेस मानक और सख्त कर दिए हैं। अब ब्रोंको टेस्ट के तुरंत बाद 2 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होगी। नए नियमों का उद्देश्य खिलाड़ियों की सहनशक्ति, मोबिलिटी और फिटनेस को बेहतर बनाना है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
07 Aug 2026, 10:01 AM
नई दिल्ली
भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाए रखने के लिए खिलाड़ियों को अब फिटनेस के मोर्चे पर पहले से ज्यादा मेहनत करनी होगी। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर टीम के प्रदर्शन के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने खिलाड़ियों के फिटनेस मानकों को और कड़ा करने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत खिलाड़ियों को ब्रोंको टेस्ट के साथ 2 किलोमीटर की दौड़ भी पूरी करनी होगी। खास बात यह है कि दोनों टेस्ट लगातार कराए जाएंगे।
पहले खिलाड़ियों को ब्रोंको टेस्ट पूरा करने के लिए 6 मिनट का समय दिया जाता था। अब इसे घटाकर 5 मिनट 15 सेकेंड से 5 मिनट 20 सेकेंड के बीच कर दिया गया है। यानी खिलाड़ियों को पहले की तुलना में करीब 40 सेकेंड कम समय मिलेगा। ब्रोंको टेस्ट में कुल पांच सेट होते हैं। प्रत्येक सेट में खिलाड़ी को 20 मीटर अप-डाउन, 40 मीटर अप-डाउन और 60 मीटर अप-डाउन दौड़ना पड़ता है। इस तरह एक सेट में कुल 240 मीटर की दौड़ होती है। पांचों सेट बिना किसी ब्रेक के पूरे करने होते हैं।

ब्रोंको के तुरंत बाद होगी 2 किलोमीटर की दौड़

फिटनेस टेस्ट की चुनौती यहीं खत्म नहीं होगी। ब्रोंको टेस्ट पूरा करने के तुरंत बाद खिलाड़ियों को 2 किलोमीटर की दौड़ भी लगानी होगी। इसे पूरा करने के लिए करीब 9 से 10 मिनट का समय दिया जाएगा। पहले 2 किलोमीटर की दौड़ अलग फिटनेस टेस्ट के रूप में कराई जाती थी। पुराने नियमों में तेज गेंदबाजों को 8 मिनट 15 सेकेंड और अन्य खिलाड़ियों को 8 मिनट 30 सेकेंड में यह दूरी पूरी करनी होती थी। अब समय में कुछ राहत जरूर दी गई है, लेकिन ब्रोंको टेस्ट के तुरंत बाद दौड़ होने के कारण खिलाड़ियों की असली परीक्षा सहनशक्ति की होगी।

फिटनेस मानकों में सख्ती की क्यों पड़ी जरूरत?

BCCI सूत्रों के मुताबिक पिछले करीब एक साल के दौरान फिटनेस टेस्ट के तय मानकों का पूरी सख्ती से पालन नहीं किया गया। कुछ सीनियर खिलाड़ियों के लिए अपेक्षाकृत आसान लक्ष्य रखे जाने की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार टीम मैनेजमेंट की मांग पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के स्टाफ ने हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी को पूरी तरह फिट नहीं होने के बावजूद क्लियरेंस दिया था। इंग्लैंड दौरे के दौरान हर्षित राणा को बढ़े हुए वजन के कारण टीम से वापस भेजे जाने की बात भी सामने आई थी। टीम मैनेजमेंट के मुताबिक उस समय हर्षित का वजन करीब 97 किलो था। अब उनके लिए वजन 96 किलो से कम रखने का लक्ष्य तय किया गया है। फिलहाल उनका वजन करीब 94 किलो बताया जा रहा है और जल्द ही उन्हें फिट घोषित किया जा सकता है।

खिलाड़ियों का ब्रोंको टेस्ट
खिलाड़ियों की लगातार चोट पर फिजियो पर जवाब मांगा

खिलाड़ियों के बार-बार चोटिल होने को लेकर भी BCCI ने सख्ती दिखाई है। इंग्लैंड के अनुकूल मौसम में भी खिलाड़ियों को मांसपेशियों में खिंचाव और क्रैम्प्स की शिकायत सामने आने के बाद BCCI सचिव देवजीत सैकिया और टीम मैनेजमेंट ने टीम फिजियो कमलेश जैन से जवाब मांगा है। फिजियो को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि खिलाड़ी कितना भी बड़ा या अनुभवी क्यों न हो, अगर उसकी फिटनेस में कमी नजर आती है तो इसकी जानकारी तुरंत टीम मैनेजमेंट को दी जाए। मैनेजमेंट का मानना है कि कुछ खिलाड़ियों की मैदान पर मोबिलिटी कम हुई है। लंबे समय तक बल्लेबाजी करने के दौरान कुछ सीनियर बल्लेबाजों को दौड़कर रन लेने में भी परेशानी हो रही है।

श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर बुमराह

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और टीम मैनेजमेंट के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठे हैं। जसप्रीत बुमराह को 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले तक फिट करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन CoE ऐसा नहीं कर सका। वहीं, सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट वाले खिलाड़ियों को नए फिटनेस नियमों की जानकारी देर से मिलने की बात भी सामने आई है। 
मोहम्मद सिराज जब श्रीलंका दौरे से पहले CoE पहुंचे तो अचानक ब्रोंको और 2 किलोमीटर का टेस्ट कराए जाने से हैरान रह गए। अब गैर-टेस्ट खिलाड़ियों को भी नए फिटनेस मानकों के मुताबिक तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

ओवर-ट्रेनिंग से बर्नआउट का खतरा

भारत का इंजरी मैनेजमेंट 2023 वनडे वर्ल्ड कप, 2024 टी20 वर्ल्ड कप और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान काफी प्रभावी रहा था। उस समय खिलाड़ियों की फिटनेस बनाए रखने के साथ उन पर जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं डालने पर भी ध्यान दिया जाता था। यो-यो टेस्ट भी आमतौर पर छह महीने में एक बार या चोट के बाद वापसी के समय कराया जाता था। अब CoE में खिलाड़ियों को यो-यो, ब्रोंको और 2 किलोमीटर जैसे फिटनेस टेस्ट से ज्यादा बार गुजरना पड़ रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इंजरी रोकने के बजाय खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा वर्कलोड डाला गया तो मानसिक और शारीरिक थकान बढ़ सकती है। इससे फिटनेस सुधारने के बजाय चोट और बर्नआउट का खतरा बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।

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