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सरकारी स्कूल में छात्रों ने खाई नींद की गोलियां
सरकारी स्कूल में छात्रों ने खाई नींद की गोलियां
दुर्ग

स्कूल में हड़कंप : 7 छात्रों ने खाई नींद की गोलियां, 4 अस्पताल में भर्ती, जांच में जुटा प्रशासन

दुर्ग के शासकीय चंद्रशेखर आजाद स्कूल में 7 छात्रों ने संदिग्ध रूप से नींद की गोलियां खा लीं, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। सभी छात्र खतरे से बाहर हैं, जबकि 4 अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और स्कूल प्रबंधन कर रहे हैं।

प्रकाशित: 19 Jul 2026, 07:42 AM · अपडेट: 14 Sep 2026, 01:06 AM
दुर्ग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
दुर्ग के नयापारा स्थित शासकीय चंद्रशेखर आजाद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ कक्षा 9वीं और 10वीं के सात विद्यार्थियों ने संदिग्ध रूप से नींद की गोलियों (जिल्फोडीन) का सेवन कर लिया, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। 
आनन-फानन में परिजनों ने बच्चों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया। राहत की बात यह है कि फिलहाल सभी बच्चों की स्थिति सामान्य और खतरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन 4 छात्र अब भी डॉक्टरों की निगरानी में अस्पताल में भर्ती हैं। यह पूरी घटना 16 जुलाई (गुरुवार) की है। 

स्कूल में मचा हड़कंप

स्कूल की प्राचार्य नलिनी सिंह के मुताबिक, गुरुवार को क्लास के दौरान अचानक एक छात्र की तबीयत बिगड़ गई और उसके मुंह से झाग निकलने लगा। स्कूल प्रबंधन ने तुरंत मामले की गंभीरता को देखते हुए उसके परिजनों को सूचित किया और उसे अस्पताल भिजवाया। इसके अगले ही दिन यानी शुक्रवार को छह और छात्रों की तबीयत खराब होने की खबर सामने आई, जिससे स्कूल प्रशासन से लेकर परिजनों तक में हड़कंप मच गया। बीमार पड़े छात्रों में कक्षा नौवीं के दो और दसवीं के पांच छात्र शामिल हैं। 

गोलियां स्कूल लाने का सस्पेंस बरकरार 

जब बच्चों से पूछताछ की गई, तो उन्होंने दसवीं कक्षा के ही एक अन्य छात्र पर यह गोलियां (जिल्फोडीन टेबलेट) लाकर देने का गंभीर आरोप लगाया है। बड़ा सवाल: छात्र आखिर ये गोलियां स्कूल क्यों लाया था और बच्चों ने इसका सेवन क्यों किया, इस पर सस्पेंस बरक़रार है। शाला विकास समिति के अध्यक्ष भूपेन्द्र यादव ने बताया कि बच्चे पूछताछ में लगातार अपने बयान बदल रहे हैं और हर कोई अलग वजह बता रहा है। असली वजह का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। 

टैबलेट देने वाले छात्रों को टीसी 

घटना की भनक लगते ही स्कूल प्रबंधन तुरंत एक्शन मोड में आ गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए शाला विकास समिति की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। बैठक में सर्वसम्मति से यह कड़ा फैसला लिया गया है कि जिस छात्र ने बाकी बच्चों को यह टैबलेट लाकर दी थी, उसे स्कूल से तत्काल प्रभाव से टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) देकर बाहर कर दिया जाएगा। इस संवेदनशील मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। बीएमओ (BMO) डॉ. विनोद शुक्ला ने बताया कि विभाग ने स्कूल प्रबंधन से इस पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है ताकि मामले की तह तक जाया जा सके। 

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने जताई नाराजगी

वहीं दूसरी ओर, स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और इस तरह की लापरवाही को लेकर छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी स्कूल पहुंचे। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से मुलाकात कर मामले पर नाराजगी जताई और बच्चों की सुरक्षा पुख्ता करने की मांग की। पुलिस और प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि नाबालिग छात्रों तक डॉक्टर के पर्चे के बिना मिलने वाली यह दवा इतनी आसानी से कैसे पहुंच गई।
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