सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान : गार्जियन ऑफ द ब्लू हॉरिजन पीएम मोदी को समर्पित, कहा-हिंद महासागर हमारा साझा घर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'गार्जियन ऑफ द ब्लू हॉरिजन' से सम्मानित किया गया। उन्होंने इस सम्मान को 140 करोड़ भारतीयों और जलवायु परिवर्तन से लड़ रहे सभी देशों को समर्पित किया। पीएम मोदी ने हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, समृद्धि और भारत के MAHASAGAR विजन पर जोर देते हुए भारत-सेशेल्स की ऐतिहासिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का संदेश दिया।
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कीर्तिमान न्यूज
28 Jun 2026, 04:12 PM
नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा भारत और हिंद महासागर क्षेत्र के कूटनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ रही है। पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सतत विकास) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत नेतृत्व दिखाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ द... ब्लू हॉरिजन’ से नवाजा गया है।
यह सम्मान न केवल भारत के बढ़ते वैश्विक कद को दर्शाता है, बल्कि पर्यावरण के प्रति देश की प्रतिबद्धता पर भी मुहर लगाता है। सर्वोच्च सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भावुक और दूरदर्शी संदेश दिया। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के प्रति आभार जताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं, बल्कि पूरे देश का है।
देशवासियों को किया समर्पित
"इस स्नेहपूर्ण स्वागत और सम्मान के लिए मैं राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी का हृदय से आभारी हूँ। 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' की उपाधि मिलना मेरे और 140 करोड़ भारतवासियों के लिए बेहद गर्व की बात है। मैं इस सम्मान को बेहद विनम्रता के साथ उन सभी देशों और लोगों को समर्पित करता हूँ, जो आज जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी और पीएम मोदीजैसी गंभीर चुनौती से अग्रिम मोर्चे पर लड़ रहे हैं और धरती को बचाने को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं।"
सुरक्षित व समृद्ध बनाने पर दिया जोर
पीएम मोदी ने साफ किया कि भारत की नीति पड़ोसियों को दबाने की नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने की है। उन्होंने हिंद महासागर को लेकर भारत के दृष्टिकोण को बेहद स्पष्ट शब्दों में रखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक ऐसे हिंद महासागर की कल्पना करता है जहां हर देश सुरक्षित महसूस करे और आर्थिक रूप से समृद्ध हो। भारत की साझेदारियाँ किसी देश के भौगोलिक आकार को देखकर तय नहीं होतीं, बल्कि आपसी सम्मान और अटूट विश्वास पर टिकी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें पास-पास रहने वाले पड़ोसियों की तरह नहीं, बल्कि कदम से कदम मिलाकर चलने वाले साथियों की तरह आगे बढ़ना होगा।
रिश्तों को किया है मजबूत
भारत का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर को अनंत अवसरों का महासागर बनाना है। दोनों देशों के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंद महासागर ने हमेशा भारत और सेशेल्स को जोड़ने वाले पुल का काम किया है। सदियों से इसकी लहरों ने हमारे व्यापार, संस्कृति और आपसी मानवीय रिश्तों को सींचा और मजबूत किया है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने वैश्विक सुरक्षा और सहयोग का मंत्र देते हुए कहा कि हिंद महासागर हम दोनों देशों का एक साझा घर है। इसकी सुरक्षा, यहाँ की स्थिरता और खुशहाली हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। यही सामूहिक भावना भारत के 'MAHASAGAR' (महासागर) विजन की असली ताकत और आधार है।