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शेयर बाजार की रफ्तार हुई धीमी
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तनाव का साया : अमेरिका-इरान टकराव से थमी शेयर बाजार की रफ्तार, रुपया 95.56 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर भारतीय वित्तीय बाजारों पर साफ दिखाई दिया। बुधवार को शेयर बाजार सपाट रुख के साथ खुले, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। निफ्टी मामूली गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि सेंसेक्स में हल्की बढ़त दर्ज की गई।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 10 Jun 2026, 04:02 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 09:33 AM
मुंबई
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

वैश्विक मोर्चे पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) का सीधा असर आज भारतीय वित्तीय बाजारों पर देखने को मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से शुरू हुई सैन्य शत्रुता ने मध्य-पूर्व (Middle East) में लंबे समय से लगाई जा रही युद्धविराम की उम्मीदों को करारा झटका दिया है। इस अनिश्चितता के कारण घरेलू शेयर बाजार बुधवार को बेहद सुस्त और सपाट रुख के साथ खुले, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के कारण भारतीय रुपये में भारी गिरावट दर्ज की गई।

सपाट चाल, लाल निशान में निफ्टी

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह 9:15 बजे बाजार खुलते ही दोनों बेंचमार्क सूचकांकों में मिला-जुला और सीमित दायरा देखने को मिला:

  • निफ्टी 50 (Nifty 50): 0.04% की मामूली गिरावट के साथ 23,233.95 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

  • बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex): 0.09% की बेहद हल्की बढ़त के साथ 73,988.27 के स्तर पर खुला।

शुरुआती कारोबार में 16 प्रमुख सेक्टर्स में से 11 में बढ़त तो देखी गई, लेकिन यह बढ़त इतनी मामूली थी कि बाजार को कोई स्पष्ट दिशा देने में नाकाम रही।

कच्चे तेल में उबाल, डॉलर के मुकाबले रुपया पस्त

अमेरिका और ईरान के बीच हुए ताज़ा हमलों के आदान-प्रदान ने कमोडिटी मार्केट को सुलगा दिया है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई अचानक तेजी का सबसे बड़ा खामियाजा भारतीय रुपये को भुगतना पड़ा है।

करेंसी मार्केट अपडेट: शुरुआती कारोबार में ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 15 पैसे (0.2%) टूटकर 95.56 के स्तर पर आ गया। कच्चे तेल का आयात महंगा होने की आशंका ने घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया है।

बीते सत्र की बढ़त पर फिरा पानी

इस भू-राजनीतिक संकट ने पिछले सत्र (मंगलवार) की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है। बीते सत्र में दोनों ही बेंचमार्क सूचकांक लगभग 0.5% की बढ़त के साथ बंद हुए थे। पिछले सत्र की तेजी के पीछे दो मुख्य कारण थे:

  1. RBI की बड़ी राहत: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों के विदेशी मुद्रा उधार को आसान बनाने के लिए प्रदान की गई फॉरेक्स स्वैप (Forex Swap) सुविधा।

  2. युद्धविराम की उम्मीद: मध्य-पूर्व के संघर्ष में अस्थायी रूप से नरमी आने के संकेत।

हालांकि, रात भर में बदले वैश्विक समीकरणों ने निवेशकों को एक बार फिर 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) की मुद्रा में ला दिया है।

मार्केट एक्सपर्ट्स की राय: आगे क्या होगा?

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मध्य-पूर्व से तनाव कम होने के ठोस संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजारों में उतार-चढ़ाव (Volatility) जारी रहेगा।

  • आईटी और फॉर्मा सेक्टर्स: रुपये की कमजोरी से आईटी और फार्मा जैसे निर्यात-आधारित सेक्टर्स को कुछ सहारा मिल सकता है।

  • पेंट, टायर और एविएशन: कच्चे तेल के दाम बढ़ने से इन सेक्टर्स के मार्जिन पर दबाव आ सकता है, इसलिए निवेशकों को रक्षात्मक (Defensive) रुख अपनाने की सलाह दी जा रही है।

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