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युद्धविराम के बाद गाजा पर निशाना
युद्धविराम के बाद गाजा पर निशाना
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संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट से हड़कंप : गाजा में युद्धविराम के बाद भी बच्चों को निशाना बना रही इजरायली सेना

United Nations के स्वतंत्र जांच आयोग की नई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि गाजा में इजरायली सैन्य अभियानों के दौरान फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले आठ महीनों में 1,000 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें 250 से ज्यादा बच्चे शामिल हैं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 25 Jun 2026, 08:37 AM · अपडेट: 30 Oct 2026, 08:40 AM
यरुशलम
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

गाजा पट्टी में जारी खूनी संघर्ष के बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक ताजा और बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र जांच आयोग ने मंगलवार (23 जून 2026) को दावा किया है कि इजरायली सेना गाजा में जानबूझकर फिलिस्तीनी बच्चों को निशाना बना रही है, जो कि सीधे तौर पर 'नरसंहार' (Genocide) जैसी श्रेणी में आता है। आयोग के मुताबिक, इजरायल के सैन्य अभियानों के कारण पूरे गाजा क्षेत्र में बच्चों को अपूरणीय क्षति पहुंची है।

8 महीनों में 250 से अधिक बच्चों की मौत

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले आठ महीनों से इजरायल गाजा पर लगातार हवाई हमले कर रहा है। इन हमलों में अब तक 1,000 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिकों की जान जा चुकी है, जिनमें 250 से अधिक मासूम बच्चे शामिल हैं। चिंताजनक बात यह है कि कुल मौतों में से करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी अकेले बच्चों की है।

गौरतलब है कि पिछले साल भी यूनाइटेड नेशन कमीशन की एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि इजरायल ने गाजा में नरसंहार को अंजाम दिया है। उस रिपोर्ट में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सहित कई शीर्ष इजरायली अधिकारियों को इन अपराधों के लिए उकसाने का दोषी माना गया था। इसी सिलसिले में इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) पहले ही पीएम नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर चुका है।

सीजफायर के बाद भी नहीं थमे हमले

यूएन कमेटी का मानना है कि बच्चों को इस तरह निशाना बनाना यह साफ करता है कि इजरायल का इरादा फिलिस्तीनी आबादी को पूरी तरह तबाह करने का है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब तब हो रहा है, जब दोनों पक्षों के बीच सीजफायर (युद्धविराम) पर सहमति बन चुकी थी।

सीएनएन (CNN) से बात करते हुए जांच आयोग के अध्यक्ष श्रीनिवासन मुरलीधर ने कहा:

"अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू होने के बाद भी जमीनी हालात नहीं बदले हैं। इजरायल अंतरराष्ट्रीय कानूनों और सीजफायर के नियमों की लगातार धज्जियां उड़ा रहा है, जिसके चलते मासूम बच्चों की मौत और उनके गंभीर रूप से घायल होने का सिलसिला थम नहीं रहा है।"

इजरायल का पलटवार: 'यह संयुक्त राष्ट्र के नाम पर फैलाया जा रहा प्रोपेगैंडा है'

दूसरी ओर, इजरायली सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। इजरायल के विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को 'प्रोपेगैंडा' करार देते हुए इसकी तीखी निंदा की है।

संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डैनी डेनन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह कोई निष्पक्ष रिपोर्ट नहीं है, बल्कि 'यूएन के दस्तावेज की आड़ में पेश की गई एक राजनीतिक रूप से प्रेरित और झूठी कहानी' है।

क्यों बदहाल हैं गाजा के लोग? Isreal ने दी सफाई

इजरायल का तर्क है कि इस पूरे विवाद की जड़ हमास है। इजरायल के मुताबिक, हमास ने सीजफायर के नियमों का उल्लंघन किया है और अपने हथियार डालने से साफ इनकार कर दिया है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इजरायल ने गाजा में निर्माण सामग्री और भारी मशीनों की एंट्री पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। इजरायल का कहना है कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल हमास अपने सैन्य ठिकाने बनाने के लिए कर सकता है। हालांकि, इस पाबंदी की वजह से आज भी गाजा के लाखों आम नागरिक भीषण गर्मी और विपरीत हालातों में तंबुओं के भीतर रहने को मजबूर हैं।

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