अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला भारत से जुड़े व्यापारिक आंकड़ों का है, जहां ट्रंप ने किसी और के नहीं, बल्कि खुद अपनी ही सरकार के आधिकारिक डेटा को सिरे से खारिज कर दिया। दरअसल, ट्रंप का मानना है कि भारत अमेरिकी सामानों पर आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा टैक्स (टैरिफ) वसूल रहा है।
हाल ही में आई एक नई किताब में व्हाइट हाउस के भीतर हुई इस दिलचस्प और तीखी बहस का खुलासा हुआ है, जिसमें ट्रंप अपने ही कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक पर भड़क गए थे।
'सब बकवास है'— जब ट्रंप ने आधिकारिक आंकड़ों को नकारा
यह पूरा वाकया पिछले साल मार्च का है, जब ट्रंप अमेरिकी सामानों पर दूसरे देशों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स के बदले 'रेसिप्रोकल टैरिफ' (बराबर टैक्स) लगाने की रणनीति पर काम कर रहे थे। ट्रेड बैरियर्स (व्यापारिक बाधाओं) पर चल रही एक बैठक के दौरान जब ट्रंप ने भारतीय टैरिफ को लेकर अपनी बात रखी, तो वहां मौजूद कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने उन्हें सरकार के आधिकारिक आंकड़े दिखाए।
आंकड़े देखते ही ट्रंप बिफर गए और उन्होंने अमेरिकी सरकार के इस ऑफिशियल डेटा को 'बकवास' (बुलशिट) करार दे दिया। लुटनिक ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि ये आंकड़े किसी बाहरी एजेंसी के नहीं, बल्कि खुद 'ऑफिस ऑफ द यूनाइटेड स्टेट ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव' (USTR) के हैं, लेकिन ट्रंप अपनी बात पर अड़े रहे।
ट्रंप का दावा: भारत लगा रहा 175% टैक्स
डोनाल्ड ट्रंप ने लुटनिक के दावों को खारिज करते हुए तर्क दिया कि असलियत सरकारी कागजों से बिल्कुल अलग है। ट्रंप के मुताबिक, भारत अमेरिकी सामानों पर तकरीबन 175 फीसदी तक का भारी-भरकम टैरिफ वसूल रहा है, जो कि आधिकारिक आंकड़ों में दर्ज संख्या से बहुत ज्यादा है। अपनी बात को सही साबित करने के लिए ट्रंप ने बैठक के दौरान ही अपने एक करीबी सहयोगी से तुरंत इस मामले को 'गूगल' करने के लिए कह दिया।'रिजीम चेंज' किताब में हुआ अंदरूनी बातचीत का खुलासा
व्हाइट हाउस के बंद कमरों में हुई इस जुबानी जंग का खुलासा मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की नई किताब 'रिजीम चेंज' में किया गया है। जून महीने में ही रिलीज हुई यह किताब ट्रंप प्रशासन के कई अंदरूनी और गुप्त घटनाक्रमों को सामने लाने का दावा करती है।
बड़ी बात: ट्रंप का यह आक्रामक रुख और भारत पर 175% टैरिफ लगाने का दावा ऐसे नाजुक समय पर सामने आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ी ट्रेड डील (व्यापार समझौते) को अंतिम रूप दिया जा रहा है। ऐसे में इस खुलासे के बाद दोनों देशों के व्यापारिक गलियारों में हलचल बढ़ना लाजिमी है।