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प्रशांत ठाकुर एसपी
प्रशांत ठाकुर एसपी
सूरजपुर

ब्लाइंड मर्डर केस : 11 दिन बाद सुलझा ब्लाइंड मर्डर केस, बेटे ने की पिता की हत्या

सूरजपुर जिले में दो बोरों में बंधी मिली अज्ञात लाश के मामले का पुलिस ने 11 दिन बाद खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि 19 वर्षीय बेटे ने पारिवारिक प्रताड़ना से तंग आकर अपने पिता की हत्या कर दी थी। वारदात के बाद शव को ठिकाने लगाने में उसके दोस्त और मौसा ने मदद की, जबकि मां ने सबूत मिटाने की कोशिश की। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 24 Jun 2026, 09:02 AM · अपडेट: 30 Oct 2026, 03:34 AM
सूरजपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में मिले एक अज्ञात शव के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। करीब 11 दिनों तक रहस्य बने इस ब्लाइंड मर्डर केस की जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सभी को हैरान कर दिया। पुलिस के अनुसार, पिता की प्रताड़ना से परेशान एक 19 वर्षीय युवक ने उनकी हत्या कर दी। बाद में शव को ठिकाने लगाने में उसके मौसा और दोस्त ने मदद की, जबकि मां ने घटना के सबूत मिटाने की कोशिश की।

मामला रामानुजनगर थाना क्षेत्र के तिवरागुड़ी गांव का है, जहां 12 जून को दो बोरों में बंधा एक शव बरामद हुआ था। शव की पहचान नहीं हो पाने के कारण पुलिस ने नियमानुसार उसका अंतिम संस्कार करा दिया था। साथ ही सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से मृतक की पहचान करने का प्रयास जारी रखा गया।

शव की पहचान के बाद जांच को मिली दिशा

करीब आठ दिन बाद मृतक के छोटे भाई ने शव की पहचान बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के चिरमी बचरापोड़ी निवासी 45 वर्षीय शिवप्रसाद गोंड के रूप में की। पहचान होते ही पुलिस ने जांच की दिशा बदलते हुए मृतक के परिवार और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतक का बेटा लंबे समय से अपने पिता के व्यवहार से परेशान था। पूछताछ में युवक ने स्वीकार किया कि 10 जून की रात उसने घर में ही मसाला पीसने वाले लोढ़ा से पिता पर हमला किया था। गंभीर चोट लगने से शिवप्रसाद गोंड की मौके पर ही मौत हो गई।

पिता-पुत्र के रिश्ते में लंबे समय से था तनाव

हत्या के बाद आरोपी ने अपने एक दोस्त की मदद से शव को बोरे में भरा और बाइक से तिवरागुड़ी स्थित अपने मौसा के घर पहुंचाया। अगले दिन रात के समय मौसा की सहायता से शव को गांव के एक मैदान में फेंक दिया गया, ताकि घटना का पता न चल सके।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मृतक की पत्नी ने घर की लिपाई-पुताई कर हत्या से जुड़े सबूत मिटाने की कोशिश की थी। आरोपियों का कहना है कि शिवप्रसाद गोंड अपने बेटे के साथ बचपन से मारपीट करता था और इसी कारण युवक मानसिक रूप से परेशान रहता था।

11 दिन की जांच के बाद चार आरोपी गिरफ्तार

लगातार 11 दिनों तक चली जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। यह घटना एक बार फिर पारिवारिक विवादों और घरेलू हिंसा के गंभीर परिणामों की ओर इशारा करती है। हालांकि, किसी भी परिस्थिति में कानून अपने हाथ में लेना समाधान नहीं माना जा सकता।
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