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डोनाल्ड ट्रंप ने दी कड़े कदम उठाने की चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने दी कड़े कदम उठाने की चेतावनी
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दिखाए तेवर : अमेरिका-ईरान वार्ता के पहले ही दौर में बढ़ा तनाव, डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को फिर दी कड़े कदम उठाने की चेतावनी

स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई वार्ता के पहले दौर के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर उभरकर सामने आया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को समझौते की शर्तों का पालन नहीं करने पर कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 23 Jun 2026, 08:29 AM · अपडेट: 24 Oct 2026, 11:04 PM
वॉशिंगटन
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में शुरू हुई बातचीत के पहले ही दौर के बाद दोनों देशों के रिश्तों में एक बार फिर कड़वाहट खुलकर सामने आ गई है। अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के महज कुछ दिनों भीतर ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ईरान ने शर्तों का पालन नहीं किया, तो अमेरिका इसका बेहद कड़ा जवाब देगा।

दरअसल, रविवार को वार्ता शुरू होने से ठीक पहले ट्रंप के एक बयान से तनाव इस कदर बढ़ गया था कि ईरानी राजनयिक कुछ देर के लिए बैठक छोड़कर बाहर चले गए थे। इसके बाद सोमवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने अपने तेवर और कड़े कर लिए। उन्होंने कहा, "अगर ईरान अपने वादों पर कायम नहीं रहता या उसका रवैया ठीक नहीं रहता है, तो मुझे जो करना चाहिए, मैं वही कदम उठाऊंगा।"

उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच एक अंतरिम समझौते पर सहमति बनी थी, जिसके बाद दोनों देशों के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में बातचीत के लिए इकट्ठा हुए थे।

निगरानी के लिए बनेगी हाई-लेवल कमेटी, परमाणु मुद्दे पर मतभेद बरकरार

तनाव के बावजूद, स्विट्जरलैंड में हुई इस बैठक से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। दोनों पक्ष बातचीत की प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए एक उच्च-स्तरीय कमेटी बनाने के लिए तैयार हो गए हैं।

  • मजबूत आधार का दावा: अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे जेडी वेंस ने इस बातचीत को लेकर उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि ईरानी अधिकारियों के साथ इस पहले दौर की चर्चा ने एक स्थायी और अंतिम समझौते की दिशा में एक ठोस नींव रख दी है।

  • ईरान का खंडन: दूसरी तरफ, तेहरान ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि इस बातचीत के एजेंडे में ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी शामिल था।

तेल निर्यात पर मिली राहत और फ्रीज फंड को लेकर छिड़ी रार

इस अंतरिम समझौते के तहत अमेरिकी ट्रेजरी (वित्त मंत्रालय) ने ईरान को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत देते हुए 21 अगस्त तक प्रतिबंधों से छूट दी है। इस छूट के बाद ईरान अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और उससे जुड़े उत्पादों का निर्यात कर सकेगा और उसका भुगतान भी हासिल कर पाएगा। इसके साथ ही विदेशों में फंसी ईरान की कुछ संपत्ति (फ्रीज एसेट्स) को भी अनलॉक किया गया है।

हालांकि, इस पैसे के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के बीच बयानों की जंग शुरू हो गई है:

डोनाल्ड ट्रंप का दावा:

"ईरान की आबादी करीब 9.1 करोड़ है और वहां खाद्यान्न का बड़ा संकट है। हमने जो पैसा रिलीज किया है, उसका इस्तेमाल ईरान को सिर्फ अमेरिका से अनाज और कृषि उत्पाद खरीदने के लिए करना होगा। यानी घूम-फिरकर यह सारा पैसा हमारे अमेरिकी किसानों की जेब में ही वापस आ रहा है।"

ईरान का पलटवार:

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे पर ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दुल नासेर हेम्माती ने कड़ी आपत्ति जताई है। हेम्माती ने स्पष्ट किया कि तेहरान अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने के लिए किसी भी तरह से मजबूर या बाध्य नहीं है। ईरान इस फंड का इस्तेमाल अपनी जरूरत के मुताबिक किसी भी गैर-प्रतिबंधित आयात के लिए करने के लिए स्वतंत्र है।

60 दिनों का रोडमैप और 'हॉटलाइन' पर बनी सहमति

इस पूरी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर और पाकिस्तान की ओर से एक संयुक्त बयान जारी किया गया है। मध्यस्थ देशों के अनुसार, बर्गेनस्टॉक में दोनों पक्षों के बीच अगले 60 दिनों के भीतर एक स्थायी और पूर्ण समझौते तक पहुंचने का रोडमैप तैयार कर लिया गया है।

इसके अलावा, सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील और वैश्विक तेल व्यापार के मुख्य मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए दोनों देश एक डायरेक्ट टेलीफोन हॉटलाइन स्थापित करने पर भी सहमत हुए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या गलतफहमी को तुरंत टाला जा सके।

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