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दक्कोटोला गांव के ग्रामीण खुद सड़क सुधारते हुए
दक्कोटोला गांव के ग्रामीण खुद सड़क सुधारते हुए
राजनांदगांव

संघर्ष : दक्कोटोला के ग्रामीणों ने खुद संभाली विकास की जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के दक्कोटोला गांव के ग्रामीणों ने लंबे समय से उपेक्षित सड़क की मरम्मत खुद शुरू कर दी है। पिछले 25 वर्षों से सड़क बनाने की मांग के बावजूद, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मदद न मिलने के कारण गांव के लोग चंदा और स्वयं के श्रम से इस काम को संभाल रहे हैं। बरसात के मौसम में सड़क की स्थिति और खराब हो जाती है,

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 11 Jun 2026, 04:07 PM · अपडेट: 03 Oct 2026, 06:04 AM
राजनांदगांव
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ में सुशासन, विकास और जनकल्याण के दावों के बीच मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के दक्कोटोला गांव की तस्वीर जमीनी हकीकत बयां कर रही है। पिछले 25 वर्षों से सड़क निर्माण की मांग करते ग्रामीण अब सरकारी मदद की उम्मीद छोड़कर स्वयं सड़क बनाने में जुट गए हैं। वर्षों तक जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उन्होंने चंदा इकट्ठा कर सड़क की मरम्मत शुरू कर दी।

मामला अंबागढ़ चौकी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत खुर्शीटीकुल के आश्रित दक्कोटोला गांव का है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव तक पहुंचने वाली सड़क वर्षों से बदहाल स्थिति में है। बरसात के दिनों में सड़क पूरी तरह दलदल में बदल जाती है, जिससे गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से लगभग कट जाता है। खराब सड़क के कारण स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और मरीज भारी परेशानियों का सामना करते हैं।

सरकारी फाइलें और अधूरी योजनाएं

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले ढाई दशक में सड़क निर्माण के लिए कई बार आवेदन दिए गए। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों तक समस्या पहुंचाई गई। सड़क निर्माण के लिए सर्वे और एस्टीमेट भी तैयार हुए, लेकिन फाइलें सरकारी दफ्तरों में अटक गईं। नतीजतन, सड़क निर्माण का सपना आज तक अधूरा रहा। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि हर साल वे आपस में चंदा जुटाकर अस्थायी मरम्मत करते हैं। 

सुशासन तिहार में उठाई गई मांग

प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित सुशासन तिहार में भी ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग उठाई थी। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीण नाराज हैं और कहते हैं कि यदि बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जनता को खुद चंदा जुटाना पड़े, तो सरकारी योजनाओं और विकास के दावों पर संदेह होना स्वाभाविक है।

सवालों के घेरे में प्रशासन

25 वर्षों से सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित दक्कोटोला के ग्रामीणों की स्थिति कई सवाल खड़े करती है। आखिर सड़क निर्माण की फाइलें वर्षों तक क्यों अटकी रहीं? जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने क्या प्रयास किए? और इस बार क्या ग्रामीणों को वास्तव में पक्की सड़क मिलेगी या केवल आश्वासनों पर ही संतोष करना पड़ेगा

मुश्किलों का रास्ता बना संपर्क मार्ग

अंबागढ़ चौकी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत खुर्शीटीकुल के आश्रित गांव दक्कोटोला तक पहुंचने वाला मार्ग लंबे समय से जर्जर है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे और कीचड़ ने आवागमन को बेहद कठिन बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश शुरू होते ही यह सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है और गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग कट जाता है।

मरीजों और बच्चों के लिए खतरा

बरसात के दौरान सड़क पर चलना जोखिम भरा हो जाता है। कई बार लोग फिसलकर घायल हो चुके हैं। गंभीर बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। स्कूली बच्चों को प्रतिदिन खतरे में रहकर स्कूल जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में राशन और अन्य जरूरी सामान लाने के लिए उन्हें करीब 10 किलोमीटर संघर्ष करना पड़ता है। 

सामने आई जमीनी सच्चाई

छत्तीसगढ़ में विकास, सुशासन और जनकल्याण के बड़े-बड़े दावों के बीच मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के दक्कोटोला गांव की कहानी सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए 25 वर्षों तक इंतजार करने के बाद ग्रामीणों ने अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से उम्मीद छोड़ दी है। हालात ऐसे बन गए कि लोगों को खुद चंदा जुटाकर सड़क की मरम्मत का जिम्मा उठाना पड़ा।

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