सिस्टम की लाचारी : पति की मौत का तीजा चल रहा था, इधर एंबुलेंस ने दिया दगा, बस स्टॉप पर साड़ी की ओट में हुआ जन्म
दमोह जिले के जबेरा क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। एंबुलेंस सेवा समय पर नहीं पहुंचने के कारण एक गर्भवती महिला को सड़क किनारे बने यात्री प्रतीक्षालय में बच्चे को जन्म देना पड़ा। स्थानीय महिलाओं ने साड़ियों का पर्दा बनाकर प्रसव कराया। मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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कीर्तिमान न्यूज
09 Jul 2026, 09:05 AM
दमोह
मध्य प्रदेश के दमोह जिले से सरकारी दावों और जमीनी हकीकत की पोल खोलती एक बेहद विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और एंबुलेंस सेवा की कछुआ चाल के चलते, एक बेबस गर्भवती महिला को सड़क किनारे बने बस स्टैंड (यात्री प्रतीक्षालय) में बच्चे को जन्म देना पड़ा।
यह वाकया सिर्फ एक डिलीवरी का नहीं है, बल्कि उस सिस्टम की नाकामी का जीता-जागता सबूत है जो हर नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दम भरता है। यह दिल दहला देने वाला मामला जबेरा तहसील के माला ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले नया गांव टोला का है।
टूटा दुखों का पहाड़
पीड़िता कविता बाई (30 वर्ष) के घर पर दुखों का पहाड़ पहले से ही टूटा हुआ था। महज 10 दिन पहले ही आसमानी बिजली गिरने की वजह से उसके पति रतन सिंह की मौत हो गई थी। पूरा परिवार इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था और घर में पति के निधन के बाद का रीति-रिवाज (गंगाजलि/तीजा कार्यक्रम) चल रहा था। इसी दौरान कविता को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
एंबुलेंस पहुंचने में 8 घंटे का इंतजार
परिजनों ने तुरंत '108' सरकारी एंबुलेंस सेवा को फोन घुमाया। लेकिन दूसरी तरफ से जो जवाब मिला, उसने परिवार के होश उड़ा दिए। एंबुलेंस ऑपरेटर ने कहा कि गाड़ी को पहुंचने में कम से कम 8 घंटे का समय लगेगा। गर्भवती महिला की हालत बिगड़ती देख परिजन एंबुलेंस के भरोसे नहीं बैठ सके। आनन-फानन में उन्होंने एक ई-रिक्शा का इंतजाम किया और अस्पताल के लिए रवाना हो गए। लेकिन बदकिस्मती ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा।
यात्री प्रतीक्षालय में बच्चे का जन्म बस स्टॉप पर कराया प्रसव
अभी वे बम्होरी बस स्टैंड के पास ही पहुंचे थे कि ई-रिक्शे की बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज हो गई। मजबूरन परिजनों ने दर्द से तड़पती कविता को बस स्टैंड के यात्री प्रतीक्षालय में बिठाया। एक घंटे तक वहां भी एंबुलेंस का इंतजार किया गया, लेकिन मदद नहीं पहुंची। महिला की चीखें सुनकर आसपास के गांव की कुछ स्थानीय महिलाएं मौके पर इकट्ठा हुईं। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन ग्रामीण महिलाओं ने तत्परता दिखाई और अपनी साड़ियों का पर्दा बनाकर बस स्टॉप पर ही कविता का सुरक्षित प्रसव कराया।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही
इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की सबसे शर्मनाक लापरवाही यह रही कि जिस यात्री प्रतीक्षालय में यह सब ड्रामा चल रहा था, वहां से महज 100 मीटर की दूरी पर बम्होरी का 'उप स्वास्थ्य केंद्र' मौजूद है। लेकिन हमेशा की तरह वह सिर्फ कागजों पर ही चल रहा था, मौके पर न तो कोई डॉक्टर था और न ही कोई नर्सिंग स्टाफ। बाद में जब स्थानीय सरपंच प्रतिनिधि रितेश राय को इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने इंसानियत दिखाते हुए तुरंत अपने निजी वाहन की व्यवस्था की।
स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल
इसके बाद जच्चा और बच्चा दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (रोंड) पहुंचाया गया। राहत की बात बस इतनी है कि इस वक्त मां और नवजात शिशु दोनों सुरक्षित और स्वस्थ हैं, लेकिन इस घटना ने दमोह के स्वास्थ्य महकमे पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।