भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई देने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो आज (23 मई) से अपने चार दिवसीय ऐतिहासिक भारत दौरे पर हैं। विदेश मंत्री का पदभार संभालने के बाद रुबियो की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है, जिसे कूटनीतिक हलकों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालिया समय में व्यापार और टैरिफ (सीमा शुल्क) को लेकर उपजे तनाव के बाद, इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच आपसी विश्वास को बहाल करना और कंक्रीट समझौतों को अमलीजामा पहनाना है।
कोलकाता से हुई शुरुआत
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने इस महत्वपूर्ण दौरे की शुरुआत पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से की।
मदर हाउस का दौरा: कोलकाता पहुंचते ही रुबियो सीधे मदर टेरेसा की संस्था 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' के वैश्विक मुख्यालय 'मदर हाउस' पहुंचे। वहाँ उन्होंने मदर टेरेसा को श्रद्धांजलि अर्पित की और संस्था द्वारा संचालित बच्चों के होम का दौरा कर बच्चों से मुलाकात की।
सांस्कृतिक कूटनीति: इस दौरान उनके ऐतिहासिक विक्टोरिया मेमोरियल जाने का भी कार्यक्रम है। जानकारों का मानना है कि रुबियो की कोलकाता से शुरुआत भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता के प्रति अमेरिका के सम्मान को दर्शाती है।
दिल्ली में हाई-प्रोफाइल बैठकें
कोलकाता के सांस्कृतिक दौरे के बाद रुबियो देश की राजधानी नई दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। दिल्ली का एजेंडा पूरी तरह से रणनीतिक और आर्थिक कूटनीति पर केंद्रित है।
पीएम मोदी से मुलाकात: रुबियो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार मुलाकात करेंगे, जहाँ दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच भविष्य के रोडमैप पर चर्चा होगी।
जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक इस दौरे का टर्निंग पॉइंट मानी जा रही है।
इन मुख्य मुद्दों पर केंद्रित रहेगी बातचीत:
रक्षा सहयोग (Defense Cooperation): दोनों देशों के बीच अत्याधुनिक सैन्य तकनीक साझा करने पर सहमति।
व्यापार और टैरिफ: पिछले कुछ समय से जारी व्यापारिक गतिरोध और टैरिफ विवादों को सुलझाकर द्विपक्षीय व्यापार को गति देना।
ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): अमेरिका द्वारा भारत को तेल और गैस की सप्लाई बढ़ाने पर विशेष जोर।
क्रिटिकल टेक्नोलॉजी: एआई (AI), सेमीकंडक्टर और स्पेस टेक्नोलॉजी में संयुक्त भागीदारी।
26 मई को दिल्ली में QUAD का महाशिखर
इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण 26 मई को नई दिल्ली में होने वाली QUAD (क्वाड) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक है, जिसकी मेजबानी भारत कर रहा है।
इस बैठक में भारत और अमेरिका के अलावा जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री भी शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं।
एजेंडा: इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामक सैन्य गतिविधियों पर लगाम लगाना।
रणनीति: वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित करना, समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) को मजबूत करना और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित करना।
आगरा का दीदार और 250वीं अमेरिकी स्वतंत्रता वर्षगांठ का जश्न
अपने कूटनीतिक व्यस्तताओं के बीच मार्को रुबियो अमेरिकी दूतावास द्वारा आयोजित 250वें अमेरिकी स्वतंत्रता वर्षगांठ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जो दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों का उत्सव है।
इसके बाद वे भारत की ऐतिहासिक विरासत को देखने के लिए आगरा और जयपुर का रुख करेंगे। आगरा में वे दुनिया के अजूबों में शुमार 'ताजमहल' का दीदार करेंगे, जबकि गुलाबी नगरी जयपुर में उनके स्वागत के लिए विशेष सांस्कृतिक और कूटनीतिक कार्यक्रम तय किए गए हैं।
भारत रवाना होने से पहले क्या बोले रुबियो?
भारत की धरती पर कदम रखने से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा:
"भारत, अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अपरिहार्य (Indispensable) साझेदार है। हमारे बीच ऊर्जा और व्यापार सहयोग बढ़ाने की असीम संभावनाएं हैं। अमेरिका रणनीतिक रूप से भारत को अधिक तेल और गैस की आपूर्ति करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है ताकि भारत की ऊर्जा जरूरतें सुरक्षित रह सकें।"
निष्कर्ष:
23 मई से 26 मई तक चलने वाला यह दौरा सिर्फ बैठकों का दौर नहीं है, बल्कि यह बदलते वैश्विक परिदृश्य (Global Geopolitics) में भारत-अमेरिका के बीच '21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारी' को एक नया आयाम देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
