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मेट्रो सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रेन संचालन अपडेट दृश्य
मेट्रो सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रेन संचालन अपडेट दृश्य
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बदलाव : CMRS निरीक्षण के बाद बढ़ेगी ट्रेनों की स्पीड और संख्या

भोपाल मेट्रो के संचालन को लेकर यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। जुलाई से नया सिग्नलिंग सिस्टम शुरू होने के बाद ट्रेनों की रफ्तार और फ्रीक्वेंसी दोनों में सुधार होगा। सुभाष नगर–एम्स 7 किमी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग का काम पूरा हो चुका है, जबकि CMRS टीम जल्द अंतिम निरीक्षण करेगी।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 17 Jun 2026, 03:57 PM · अपडेट: 07 Oct 2026, 10:26 PM
मध्य प्रदेश
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

भोपाल मेट्रो के धीमे संचालन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जुलाई से मेट्रो सेवा के संचालन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नए सिग्नलिंग सिस्टम के शुरू होते ही ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और फ्रीक्वेंसी भी पहले से बेहतर होगी।

भोपाल मेट्रो प्रबंधन ने जानकारी दी है कि जुलाई महीने से नया सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगा। इसके लागू होने के बाद ट्रेनों की गति में सुधार होगा और संचालन अधिक नियमित और तेज हो सकेगा। इसके लिए एक नया ऑपरेशनल शेड्यूल भी तैयार किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को कम समय में बेहतर सुविधा मिल सके।

CMRS टीम करेगी अंतिम निरीक्षण

कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को अंतिम निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया गया है। संभावना है कि यह टीम अगले सप्ताह भोपाल पहुंचकर पूरे सिस्टम, सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी तैयारियों का बारीकी से परीक्षण करेगी। इससे पहले असिस्टेंट कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी की टीम प्रारंभिक निरीक्षण पूरा कर चुकी है, जिसमें कई तकनीकी पहलुओं को जांचा गया था। सुभाष नगर से एम्स स्टेशन तक करीब 7 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम लगाने का कार्य पूरा कर लिया गया है। यह कॉरिडोर भोपाल मेट्रो के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है। भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं के तहत लगभग 30 किलोमीटर नेटवर्क में यह आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था विकसित की जा रही है।

एक ट्रैक पर सीमित संचालन बनी बड़ी चुनौती

फिलहाल मेट्रो सेवा सीमित ट्रैक पर ही संचालित हो रही है, क्योंकि पूरी सिग्नलिंग व्यवस्था अभी सक्रिय नहीं है। इसी वजह से ट्रेनों की संख्या और उनकी फ्रीक्वेंसी प्रभावित हो रही है। वर्तमान व्यवस्था में एक ट्रेन एक दिशा में जाने के बाद उसी ट्रैक का उपयोग करके वापस लौटती है, जिससे संचालन की गति धीमी पड़ जाती है और यात्रियों को अगली ट्रेन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू होने के बाद मेट्रो संचालन में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। ट्रेनों की आवृत्ति बढ़ेगी, रफ्तार तेज होगी और यात्रियों को अधिक नियमित सेवा मिल सकेगी। प्रबंधन का दावा है कि आने वाले महीनों में भोपाल मेट्रो का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा।

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