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तंबाकू की लत सेहत के लिए गंभीर खतरा
तंबाकू की लत सेहत के लिए गंभीर खतरा
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हिंसा का शिकार : किशोरों में बढ़ रही सिगरेट और ई-सिगरेट की लत

एक नई शोध में सामने आया है कि बुलिंग, साइबर बुलिंग, यौन हिंसा और घरेलू हिंसा जैसी घटनाओं का सामना करने वाले किशोरों में सिगरेट और ई-सिगरेट के इस्तेमाल की संभावना अधिक होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मानसिक तनाव और भावनात्मक आघात से जूझ रहे बच्चे कई बार तंबाकू उत्पादों की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जो आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

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प्रकाशित: 30 May 2026, 04:19 PM · अपडेट: 23 Oct 2026, 11:08 PM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
आज के डिजिटल दौर में किशोरों के सामने केवल पढ़ाई और करियर की चुनौतियां ही नहीं हैं, बल्कि बुलिंग, साइबर बुलिंग, घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। इन घटनाओं का असर सिर्फ उनके मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, यह उनके व्यवहार और जीवनशैली पर भी गहरा प्रभाव डालता है। हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हिंसा और उत्पीड़न का सामना करने वाले किशोरों में सिगरेट और ई-सिगरेट के सेवन की संभावना सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक होती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि मानसिक तनाव, अवसाद और भावनात्मक आघात से जूझ रहे कई किशोर राहत पाने के लिए तंबाकू और निकोटीन उत्पादों की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जो आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

लड़के और लड़कियां दोनों प्रभावित

अध्ययन में पाया गया कि हिंसा का असर केवल किसी एक लिंग तक सीमित नहीं है। लड़के और लड़कियां दोनों ही हिंसा के संपर्क में आने के बाद सिगरेट और ई-सिगरेट के अधिक उपयोग की ओर बढ़ सकते हैं। हालांकि हिंसा के प्रकार और उसके प्रभाव में कुछ अंतर देखने को मिले, लेकिन कुल मिलाकर जोखिम दोनों समूहों में बढ़ा हुआ पाया गया।  किशोरावस्था जीवन का बेहद संवेदनशील दौर होता है। इस उम्र में मिलने वाले नकारात्मक अनुभव व्यवहार और आदतों को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं।

साइबर बुलिंग और मानसिक तनाव

साइबर बुलिंग वह स्थिति है, जब किसी व्यक्ति को इंटरनेट, सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप, ऑनलाइन गेम या अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए जानबूझकर परेशान, अपमानित, धमकाया या मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। इसमें किसी का मजाक उड़ाना, फर्जी अकाउंट बनाकर बदनाम करना, अपमानजनक संदेश भेजना, निजी तस्वीरें या वीडियो बिना अनुमति के साझा करना और अफवाह फैलाना जैसी गतिविधियां शामिल हैं। बुलिंग का शिकार होने वाले बच्चों और किशोरों में तनाव, चिंता, अवसाद, आत्मविश्वास की कमी और पढ़ाई पर नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। शोध में यह भी संकेत मिला कि ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करने वाले किशोरों में ई-सिगरेट के उपयोग की संभावना अधिक हो सकती है। ई-सिगरेट को कई युवा पारंपरिक सिगरेट की तुलना में कम हानिकारक समझते हैं, जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसके लंबे समय के दुष्प्रभावों को लेकर लगातार चेतावनी देते रहे हैं।

स्वास्थ्य पर गंभीर असर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार किशोरावस्था में तंबाकू सेवन शुरू करने वाले लोगों में आगे चलकर हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियां, कैंसर और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ई-सिगरेट में मौजूद निकोटीन भी मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकता है, खासकर किशोरों में। तंबाकू नियंत्रण की रणनीतियों में केवल उत्पादों की बिक्री पर रोक या जागरूकता अभियान ही पर्याप्त नहीं हैं। बच्चों और किशोरों को हिंसा, उत्पीड़न और असुरक्षित वातावरण से बचाना भी उतना ही जरूरी है।

शोधकर्ता के अनुसार बचाओ के तरीके 

शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि स्कूलों, परिवारों और समुदायों को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा, जहां बच्चे सुरक्षित महसूस करें। बुलिंग और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं की समय पर पहचान और रोकथाम से न केवल मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि किशोरों में तंबाकू और ई-सिगरेट की बढ़ती लत को भी नियंत्रित किया जा सकेगा। अध्ययन यह संकेत देता है कि हिंसा और नशे की समस्या एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए किशोर स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए मानसिक, सामाजिक और व्यवहारिक पहलुओं पर एक साथ काम करने की आवश्यकता है।
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