श्योपुर जिले के बरगवां थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि रामकृष्ण विवेकानंद सेवा कुटीर एनजीओ की एक एम्बुलेंस का इस्तेमाल मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के बजाय पेट्रोल और डीजल के अवैध परिवहन के लिए किया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और स्थानीय लोग पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस एम्बुलेंस का उपयोग आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए होना चाहिए, उसी वाहन से पेट्रोल और डीजल का परिवहन किया जा रहा है। उनका कहना है कि एम्बुलेंस होने के कारण इस वाहन को रास्ते में सामान्य वाहनों की तुलना में कम रोका जाता है और कई स्थानों पर बिना जांच के ही गुजरने दिया जाता है। यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन होगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर जनता के भरोसे के साथ भी गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा।
मरीजों की सुरक्षा पर भी उठे सवाल
उनका आरोप है कि यदि किसी आपात स्थिति में मरीज को तत्काल एम्बुलेंस की जरूरत पड़े और वाहन किसी अन्य कार्य में व्यस्त हो, तो उसकी जान जोखिम में पड़ सकती है। यही वजह है कि लोग पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं। मामले को लेकर जब परिवार रामकृष्ण विवेकानंद सेवा कुटीर एनजीओ के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार की कोई शिकायत सामने आई है, तो उसकी जांच कराई जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि एम्बुलेंस जैसी जीवनरक्षक सेवा से जुड़े वाहन का इस तरह उपयोग किया जाना बेहद चिंताजनक है।एनजीओ अधिकारियों ने जांच का दिया भरोसा
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि संबंधित एम्बुलेंस किसके नियंत्रण में संचालित हो रही थी, उसमें पेट्रोल-डीजल ले जाने की अनुमति किसने दी थी और यदि ऐसा हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गए हैं। क्या एम्बुलेंस का उपयोग वास्तव में स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा था|
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि एम्बुलेंस जैसे संवेदनशील और जीवनरक्षक वाहन का किसी भी गैर-स्वास्थ्य कार्य में उपयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि संबंधित एम्बुलेंस के संचालन रिकॉर्ड, जीपीएस डेटा, ड्यूटी रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की जाए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए
प्रशासनिक जांच पर टिकी सबकी नजर
यदि ऐसा हुआ, तो इसके पीछे किसका निर्देश था? क्या संबंधित विभाग और जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी? इन सवालों के जवाब अब जांच पर निर्भर करेंगे।
फिलहाल यह मामला आरोपों के आधार पर सामने आया है और संबंधित एजेंसियों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि या खंडन होना बाकी है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होती है, तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी। वहीं, यदि जांच में लापरवाही बरती गई, तो एम्बुलेंस की आड़ में अवैध गतिविधियों को लेकर उठ रहे सवाल और गहराते जाएंगे।