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कीचड़ भरे रास्ते से निकली अंतिम यात्रा
कीचड़ भरे रास्ते से निकली अंतिम यात्रा
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बरसात बनी मुसीबत: मुरैना में कीचड़ से होकर निकली अंतिम यात्रा, श्मशान तक सड़क नहीं

मुरैना के ग्राम गड़ुआ जाटव का पुरा में बारिश के कारण श्मशान तक जाने का रास्ता कीचड़ और जलभराव से भर गया। अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों को शव कंधों पर उठाकर दुर्गम रास्ते से गुजरना पड़ा। ग्रामीणों ने श्मशान घाट और पक्की सड़क के निर्माण की मांग करते हुए विकास के दावों पर सवाल उठाए।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
08 Jul 2026, 02:57 PM
मध्य प्रदेश

मुरैना जिले की जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत नावली बड़ागांव के ग्राम गड़ुआ जाटव का पुरा में बरसात के दौरान मूलभूत सुविधाओं का अभाव एक बार फिर उजागर हुआ है। गांव में न तो व्यवस्थित श्मशान घाट है और न ही अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता। लगातार हो रही बारिश के कारण पूरा मार्ग कीचड़ और जलभराव से भर गया है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कीचड़ भरे रास्ते से निकली अंतिम यात्रा

मंगलवार रात गांव निवासी छविराम का आकस्मिक निधन हो गया। बुधवार को अंतिम संस्कार के लिए जब परिजन और ग्रामीण शव लेकर श्मशान की ओर निकले, तो उन्हें कीचड़ और दुर्गम रास्ते से होकर गुजरना पड़ा। बरसात के कारण हालात इतने खराब थे कि अंतिम यात्रा निकालना भी किसी चुनौती से कम नहीं रहा। ग्रामीणों को शव को कंधों पर उठाकर फिसलन भरे रास्ते से गुजरना पड़ा।

सड़क की मांग अब तक अधूरी

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से श्मशान घाट और वहां तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। बरसात के मौसम में हर वर्ष ऐसी ही परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिससे ग्रामीणों में लगातार नाराजगी बनी हुई है।

स्थायी समाधान की उठी मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि गांव में जल्द श्मशान घाट का निर्माण कराया जाए तथा वहां तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को अपने प्रियजन के अंतिम संस्कार के समय ऐसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

विकास के दावों पर ग्रामीणों के सवाल

सरकार भले ही ग्रामीण विकास और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन गड़ुआ जाटव का पुरा की तस्वीर उन दावों की हकीकत बयां करती नजर आ रही है। बरसात के दौरान श्मशान तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता न होना आज भी ग्रामीणों के लिए एक बड़ी समस्या बना हुआ है, जिससे विकास के दावों पर सवाल खड़े हो रहे

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