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जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाती पुलिस
जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाती पुलिस
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वांगचुक अस्पताल में भर्ती : 20 दिन से अनशन पर बैठे सोनम को पुलिस ने जबरन उठाया, समर्थकों ने लगाया आंदोलन दबाने का आरोप

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 दिनों से आमरण अनशन कर रहे पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को बिगड़ती तबीयत के चलते दिल्ली पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की सलाह पर यह कदम उठाया गया, जबकि समर्थकों ने इसे आंदोलन दबाने की कोशिश बताया। वांगचुक ने 20 जुलाई के चलो संसद मार्च और NEET विवाद को लेकर अपनी मांगें दोहराईं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 18 Jul 2026, 10:17 AM · अपडेट: 28 Oct 2026, 06:12 PM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर शनिवार को एक बार फिर भारी गहमा-गहमी का गवाह बना। पिछले 20 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे मशहूर पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने धरना स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया है। 
लगातार भूख हड़ताल के चलते वांगचुक की सेहत बेहद नाजुक बनी हुई थी और डॉक्टरों के मुताबिक उनका वजन करीब 10 किलो तक गिर चुका था। पुलिस की इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर पर तनाव बढ़ गया है और उनके समर्थकों ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने की सरकारी साजिश करार दिया है। पुलिस की इस कार्रवाई से ठीक पहले माहौल उस वक्त गरमा गया, जब 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक सनसनीखेज दावा किया। 

प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा, वांगचुक अस्पताल में 

दीपके ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कुछ शरारती तत्वों ने सोनम वांगचुक पर पत्थरों से हमला करने की कोशिश की थी। इस सुरक्षा चूक और बिगड़ती सेहत के बीच, दिल्ली पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची और वांगचुक को तुरंत राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल ले गई। फिलहाल जंतर-मंतर पर डटे अन्य प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस वहां से खदेड़ रही है।
अपनी गिरती सेहत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा: 
"हाँ, मैं अभी जीवित हूँ। मेरे शरीर का 20 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह क्षीण हो चुका है। अनशन में पहले शरीर की चर्बी खत्म होती है, फिर मांसपेशियां और उसके बाद अंग प्रभावित होने लगते हैं। लेकिन मैं हर हाल में 20 जुलाई तक जिंदा रहना चाहता हूँ।" 

जंतर-मंतर से हटाए जा रहे प्रदर्शनकारी
धांधली से हताशा होकर कई छात्रों ने की आत्महत्या

दरअसल, वांगचुक ने देशवासियों से 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च में भारी संख्या में जुटने की अपील की है। इस बार सोनम वांगचुक का यह अनशन केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं था। उन्होंने देश में चल रहे NEET परीक्षा विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। वांगचुक ने दावा किया कि पेपर लीक और नतीजों में धांधली के चलते देश के कई छात्रों ने हताशा में आत्महत्या की है, जिस पर सरकार पूरी तरह खामोश है। उनकी मुख्य मांग है कि इस पूरे विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। 

कार्रवाई किसी राजनीतिक दबाव में नहीं 

सोनम वांगचुक को जबरन उठाए जाने के आरोपों पर नई दिल्ली के डीसीपी ने सोशल मीडिया के जरिए पुलिस का पक्ष रखा है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि मानवीय आधार पर की गई है। डीसीपी के मुताबिक, "माननीय हाईकोर्ट के आदेश और मेडिकल एक्सपर्ट्स की गंभीर सलाह को देखते हुए सोनम वांगचुक की जान बचाने के लिए उन्हें तुरंत अस्पताल शिफ्ट करना जरूरी था। 

शांतिपूर्ण धरना स्थल खाली करने अपील 

पुलिस ने बेहद संयम और सुरक्षित तरीके से इस प्रक्रिया को पूरा किया है।" इसके साथ ही पुलिस ने जंतर-मंतर पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों से भी अपील की है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जल्द से जल्द और शांतिपूर्ण तरीके से धरना स्थल को खाली कर दें।
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