पानी का संकट : प्रशासनिक दावों की खुली पोल, दिव्यांग महिला के घर सूखा पड़ा नल
बस्तर ब्लॉक के जामगुड़ा गांव की एक दिव्यांग महिला, जिसकी पेयजल समस्या पहले सुर्खियों में आई थी, आज भी पानी के लिए संघर्ष करने को मजबूर है। खबर सामने आने के बाद प्रशासन ने उसके घर के पास नल तो लगवा दिया, लेकिन कुछ दिनों बाद ही जलापूर्ति बंद हो गई।
बस्तर ब्लॉक के जामगुड़ा गांव में रहने वाली एक दिव्यांग महिला की पेयजल समस्या एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। कुछ समय पहले महिला की दर्दनाक स्थिति तब सामने आई थी, जब उसे प्यास बुझाने और घरेलू जरूरतों के लिए पानी लाने हेतु व्यस्त सड़क पार कर अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती थी।
मामला सार्वजनिक होने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला के घर के समीप नल कनेक्शन उपलब्ध कराया था, लेकिन यह व्यवस्था स्थायी समाधान साबित नहीं हो सकी।
ग्रामीणों के अनुसार नल स्थापना के बाद शुरुआती दिनों में पानी की आपूर्ति हुई, जिससे महिला और उसके परिवार को काफी राहत मिली थी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद जलापूर्ति बंद हो गई। अब नल तो मौजूद है, पर उसमें पानी नहीं आ रहा है। परिणामस्वरूप महिला को फिर से पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है और उसे पुरानी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दिव्यांग महिला की परेशानी फिर बनी चिंता का विषय
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल नल लगवा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसमें नियमित पानी पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। दिव्यांग होने के कारण महिला के लिए दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना बेहद कठिन है। ऐसे में सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब जलापूर्ति व्यवस्था लगातार और सुचारु रूप से संचालित हो। जब इस मामले को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें इस समस्या की जानकारी मिली थी, अधिकारियों को तत्काल मौके पर भेजा गया था। महिला की सहायता के साथ-साथ उसके घर के पास पानी की व्यवस्था भी कराई गई थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि वर्तमान में जलापूर्ति बाधित है तो संबंधित अधिकारियों से पुनः जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
जमीनी हकीकत के बीच बढ़ता अंतर
जामगुड़ा गांव की यह स्थिति सरकारी योजनाओं और उनके क्रियान्वयन के बीच मौजूद खाई को उजागर करती है। प्रशासन द्वारा किए गए दावों के बावजूद यदि लाभार्थी तक नियमित सुविधा नहीं पहुंच पा रही है, तो योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान तभी माना जाएगा, जब दिव्यांग महिला के घर तक निरंतर और पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्ध हो।
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर
मामला दोबारा सुर्खियों में आने के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार केवल औपचारिक व्यवस्था नहीं, बल्कि नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि दिव्यांग महिला को रोजमर्रा की इस बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष न करना पड़े।