जेल में हड़कंप : 10 दिन में तीसरी मौत, कैदी की अस्पताल में गई जान
जगदलपुर केंद्रीय जेल में रेप केस के आरोपी 60 वर्षीय कैदी सुदु कश्यप की तबीयत बिगड़ने के बाद डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई। उसका ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ गया था, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यह घटना जेल में पिछले 10 दिनों के भीतर तीसरी मौत है, जिससे जेल प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जगदलपुर केंद्रीय जेल में रेप के एक मामले में बंद 60 वर्षीय कैदी सुदु कश्यप की इलाज के दौरान मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने पर ब्लड प्रेशर (BP) काफी बढ़ गया था, जिसके बाद उसे डिमरापाल मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
जानकारी के अनुसार, सुदु कश्यप की तबीयत 6 जून की रात करीब 11:40 बजे अचानक गंभीर हो गई थी। जेल प्रशासन ने तत्काल उसे मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां उसका इलाज शुरू किया गया। हालांकि स्थिति लगातार बिगड़ती गई और रविवार 7 जून की शाम करीब 7:45 बजे इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
2025 से जेल में बंद था आरोपी
मृतक सुदु कश्यप कर्रेकोट नयापारा, थाना मारडूम, जिला बस्तर का निवासी था। वह रेप के एक मामले में आरोपी था और 28 अक्टूबर 2025 से जगदलपुर केंद्रीय जेल में न्यायिक अभिरक्षा में बंद था। जेल के भीतर पिछले 10 दिनों में यह तीसरी मौत है, जिससे जेल प्रबंधन और कैदियों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि सभी मामलों में कारण अलग-अलग बताए जा रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। कुछ दिन पहले जेल में बंद एक महिला कैदी ने बैरक के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। वह अपने ही चाचा की हत्या के मामले में न्यायिक हिरासत में बंद थी। इस घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले ही चिंता बढ़ा दी थी।
बाथरूम में गिरने से बंदी की मौत
इसके अलावा नक्सल मामले में बंद 33 वर्षीय रमेश कुंजाम की भी मौत हुई थी। बताया गया कि वह बाथरूम में गिर गया था, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जगदलपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुशील मौर्य ने इन लगातार मौतों को गंभीर लापरवाही बताया है। उन्होंने कहा कि 10 दिनों में तीन मौतें जेल प्रशासन की व्यवस्था पर बड़ा सवाल हैं और यह सुरक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं की विफलता को दर्शाता है।
इलाज व्यवस्था पर उठे सवाल
कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जेल के अंदर आत्महत्या के लिए सामग्री कैसे उपलब्ध हो रही है और गंभीर रूप से बीमार कैदियों को समय पर उचित इलाज क्यों नहीं मिल रहा। पार्टी ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है। कांग्रेस ने मांग की है कि इन तीनों मौतों की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए। साथ ही दोषी जेल अधिकारियों और कर्मचारियों पर आपराधिक मामला दर्ज कर उन्हें निलंबित करने की मांग भी की गई है। पार्टी ने मृतक कैदियों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए मुआवजा देने और जेल में स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने की मांग की है। साथ ही 7 दिनों के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की अपील की गई है।
सरकार पर तीखा हमला
सुशील मौर्य ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक उग्र आंदोलन करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।