बिलासपुर के बहुचर्चित विराट सराफ अपहरण कांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाते हुए सभी दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने आरोपियों द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि मासूम बच्चों का अपहरण कर फिरौती मांगना केवल एक परिवार के खिलाफ अपराध नहीं, बल्कि पूरे समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा करने वाला गंभीर कृत्य है।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि बच्चों को निशाना बनाकर पैसों के लिए अपहरण करना अमानवीय और संगठित अपराध की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने माना कि ऐसे मामलों से पीड़ित परिवार लंबे समय तक मानसिक तनाव और सामाजिक आघात से गुजरता है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि ऐसे अपराधों पर सख्ती नहीं बरती गई तो समाज में कानून के प्रति भय कम हो सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को सही ठहराया।
डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों को माना मजबूत आधार
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में पुलिस जांच और तकनीकी साक्ष्यों को बेहद महत्वपूर्ण बताया। अदालत ने कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), फिंगरप्रिंट रिपोर्ट, CCTV फुटेज और आरोपियों के वॉयस सैंपल ने पूरे मामले की कड़ी को मजबूत किया। कोर्ट ने माना कि जांच एजेंसियों ने वैज्ञानिक तरीके से सबूत जुटाए, जिससे आरोपियों की भूमिका स्पष्ट रूप से साबित हुई। यही वजह रही कि अपील के दौरान भी आरोपी अदालत को राहत देने योग्य कोई ठोस आधार पेश नहीं कर सके।
2019 में हुआ था हाई प्रोफाइल अपहरण
यह सनसनीखेज मामला वर्ष 2019 का है। बिलासपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में रहने वाले कारोबारी विवेक सराफ के बेटे विराट सराफ का उनके घर के सामने से अपहरण कर लिया गया था। घटना के अगले दिन अपहरणकर्ताओं ने परिवार से छह करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने बड़े स्तर पर जांच शुरू की और लगातार छह दिनों तक अलग-अलग टीमों ने बच्चे की तलाश की। आखिरकार सातवें दिन पुलिस ने जरहाभाठा इलाके से विराट को सकुशल बरामद कर लिया।परिवार की करीबी ही निकली मास्टरमाइंड
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब पुलिस जांच में विराट की बड़ी मां (ताई) नीता सराफ का नाम सामने आया। जांच में पता चला कि भारी कर्ज में डूबी नीता ने पैसे की जरूरत पूरी करने के लिए अपहरण की साजिश रची थी। पहले किसी अन्य रिश्तेदार के बच्चे को निशाना बनाने की योजना थी, लेकिन उसके शहर से बाहर चले जाने के बाद विराट को अगवा करने की योजना बनाई गई। इस साजिश में सतीश शर्मा, राजकिशोर सिंह, हरेकृष्ण कुमार सहित अन्य आरोपी भी शामिल थे। हाई कोर्ट के इस फैसले को प्रदेश में संगठित अपराध और फिरौती के मामलों पर सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत के इस निर्णय से ऐसे अपराधों में शामिल लोगों को स्पष्ट चेतावनी मिली है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में न्यायपालिका किसी भी तरह की नरमी बरतने के पक्ष में नहीं है।

