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बच्चों को स्कूल सामग्री वितरित करते अधिकारी
बच्चों को स्कूल सामग्री वितरित करते अधिकारी

ऐतिहासिक दस्तक : कारकाबेड़ा में शिक्षा का नया सवेरा, बच्चों के हाथों में पहुंचीं किताबें

नारायणपुर जिले के सुदूर अबूझमाड़ क्षेत्र के कारकाबेड़ा गांव में पहली बार प्राथमिक स्कूल की शुरुआत हुई है। ग्रामीणों की मांग पर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दुर्गम रास्तों से गुजरकर स्कूल का शुभारंभ कराया। बच्चों को निःशुल्क गणवेश, किताबें और शिक्षण सामग्री वितरित की गई। यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शिक्षा और शांति की नई उम्मीद मानी जा रही है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 18 May 2026, 12:31 PM · अपडेट: 28 Oct 2026, 01:41 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
​देश के गृह मंत्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ क्षेत्र अब नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर शिक्षा की नई रोशनी की ओर बढ़ रहा है। इसका सबसे सुखद और ऐतिहासिक परिणाम नारायणपुर जिले के अति दूरस्थ ग्राम कारकाबेड़ा में देखने को मिला है, जहां आजादी के बाद पहली बार किसी स्कूल की स्थापना हुई है। 
कभी नक्सलियों का गढ़ रहे इस इलाके में अब बच्चों को बंदूक की जगह कलम और किताबें मिल रही हैं। ​हाल ही में अबूझमाड़ के सुदूर क्षेत्र कोड़ेनार में एक जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में कारकाबेड़ा के ग्रामीणों ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए गांव में ही स्कूल खोलने की पुरजोर मांग की थी। कलेक्टर ने मामले की संवेदनशीलता और महत्ता को देखते हुए तत्परता दिखाई और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO)  को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

​5 घंटे की पैदल यात्रा और सर्वे

कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा विभाग की टीम ने सबसे पहले कारकाबेड़ा गांव का सर्वे किया, जिसमें 20 बच्चे प्राथमिक शिक्षा के योग्य पाए गए। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी,खंड स्रोत समन्वयक, संकुल समन्वयक, सरपंच और शिक्षकों की संयुक्त टीम ने अदम्य साहस का परिचय दिया। यह टीम दुर्गम रास्तों, कई नदी-नालों और पहाड़ियों को पार करते हुए लगभग 5 घंटे की कठिन पैदल यात्रा कर कारकाबेड़ा पहुंची और नवीन प्राथमिक शाला का औपचारिक शुभारंभ किया।

​मुफ्त गणवेश और शिक्षण सामग्री का वितरण

स्कूल के पहले ही दिन बच्चों के चेहरों पर एक अलग ही चमक थी। जिला प्रशासन द्वारा स्कूल प्रारंभ होने के साथ ही सभी 20 बच्चों को ​निःशुल्क गणवेश,​पाठ्यपुस्तकें और स्लेट ​पेंसिल, श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड) तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्रियां उपलब्ध कराई गईं। कारकाबेड़ा सरपंच रामूराम वड्डे ने कहा कि गांव में स्कूल खुलना हमारे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। अब हमारे बच्चों को पढ़ने के लिए जान जोखिम में डालकर दूर नहीं जाना पड़ेगा।

​अतिथि शिक्षक की व्यवस्था

वर्तमान में इस स्कूल के सुचारू संचालन के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक स्थानीय अतिथि शिक्षक की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में कारकाबेड़ा के इस स्कूल का लाभ आसपास के अन्य दूरस्थ गांवों, जैसे मरकूड़ के बच्चों को भी मिलेगा। 
नक्सलवाद के खात्मे के बाद अबूझमाड़ के इस अंदरूनी इलाके में स्कूल खुलना केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार और शांति बहाली की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
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