आईपीएल क्रिकेट मैचों की आड़ में ऑनलाइन सट्टेबाजी का काला कारोबार करने वालों पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। दुर्ग सिटी कोतवाली पुलिस ने सटोरियों के खिलाफ अपनी मुहीम तेज करते हुए 4 और आरोपियों को धर दबोचा है। इस कार्रवाई के बाद मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या अब 7 हो गई है। पुलिस अब इस संगठित गिरोह के मास्टरमाइंड और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। पहले पकड़े गए आरोपियों से जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो इस अवैध धंधे की कई कड़ियां जुड़ने लगीं और कुछ नए नाम सामने आए। इसी आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार नए आरोपियों को हिरासत में लिया:
अक्षत बोहरे
मोहम्मद आदिल
मोहम्मद अय्युब
प्रकाश सोनी
8 स्मार्टफोन (अलग-अलग कंपनियों के, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन दांव लगाने और ग्राहकों से संपर्क के लिए होता था)
9,810 रुपए नगद
सट्टे के लाखों के लेन-देन का कच्चा-चिट्ठा रखने वाली एक पॉकेट डायरी और डॉट पेन। जांच टीम अब इन जब्त मोबाइलों का कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट्स और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन हिस्ट्री खंगाल रही है ताकि गिरोह के बाकी सदस्यों तक पहुंचा जा सके।
कैसे हुआ था इस सिंडिकेट का भंडाफोड़?
इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश उस समय हुआ जब चेन्नई और दिल्ली के बीच आईपीएल मैच खेला जा रहा था। पुलिस को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि ऋषभ नगर (दुर्ग) का रहने वाला विकास जैन मोबाइल फोन और ऑनलाइन बैटिंग ऐप के जरिए हार-जीत का मोटा दांव लगवा रहा है। सूचना पर त्वरित एक्शन लेते हुए सिटी कोतवाली पुलिस की टीम ने मौके पर घेराबंदी कर रेड मारी। इस दौरान विकास जैन के साथ रौनक ताम्रकार और प्रवीण ताम्रकार को रंगे हाथों सट्टा खिलाते हुए गिरफ्तार किया गया था। इन्हीं तीनों की निशानदेही पर हालिया 4 गिरफ्तारियां हुई हैं।
बड़े नेटवर्क की आशंका
दुर्ग पुलिस का कहना है कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से आईपीएल सट्टेबाजी का संचालन कर आर्थिक मुनाफा कमा रहा था। जांच अभी जारी है और पुलिस इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इन स्थानीय बुकीज के तार किन बड़े सटोरियों या सिंडिकेट से जुड़े हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में फैले इस नेटवर्क के और भी कई गुर्गों के जल्द ही बेनकाब होने की संभावना है।
