भारत-बांग्लादेश सीमा को लेकर एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बांग्लादेश की नई सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि अब सीमा विवाद और सुरक्षा से जुड़े मामलों में वह पहले की सरकारों जैसा नरम रुख नहीं अपनाएगी। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के करीबी और विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भारत की सीमा फेंसिंग योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बांग्लादेश अब बदल चुका है और सीमा से जुड़े मुद्दों पर किसी दबाव में नहीं झुकेगा।
पश्चिम बंगाल में नई सरकार द्वारा सीमा पर फेंसिंग तेज करने के फैसले के बाद बांग्लादेश की नई सरकार ने कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के करीबी सलाहकार हुमायूं कबीर ने साफ कहा है कि अब ढाका सरकार सीमा विवाद के मुद्दों पर पहले की Sheikh Hasina सरकार जैसा नरम रवैया नहीं अपनाएगी। भारत की सीमा सुरक्षा योजना और बांग्लादेश के तीखे बयानों के बीच दोनों देशों के रिश्तों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
भारत की नई फेंसिंग योजना
दरअसल, पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 45 दिनों के भीतर जमीन सौंप दी जाएगी, ताकि सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने का काम तेज किया जा सके। सरकार का कहना है कि यह कदम अवैध घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए जरूरी है।
बांग्लादेश का बयान
भारत की इसी योजना पर बांग्लादेश की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हुमायूं कबीर ने विदेश मंत्रालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि “बांग्लादेश अब पहले जैसा नहीं रहा। सीमा विवादों पर अब ढाका कोई लचीलापन नहीं दिखाएगा। बांग्लादेश के लोग और यहां की सरकार कंटीले तारों की बाड़ से डरने वाले नहीं हैं। सीमा सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को लेकर हमारी भी अपनी योजनाएं हैं।
चुनावी बयानबाजी पर भी टिप्पणी
कबीर ने सीधे तौर पर भारत का नाम लिए बिना पश्चिम बंगाल की नई सरकार और उसके नेताओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान नेता अक्सर तीखे बयान देते हैं और कई बार राजनीतिक लाभ के लिए ऐसी बातें कही जाती हैं, जिन्हें उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि शासन चलाना और चुनावी भाषण देना दोनों अलग चीजें हैं, इसलिए अभी परिस्थितियों को समझने के लिए इंतजार करना चाहिए।
शेख हसीना सरकार
बांग्लादेश में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में बदलाव के संकेत दिखने लगे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और सीमा प्रबंधन को लेकर अपेक्षाकृत बेहतर तालमेल देखा गया था। लेकिन नई सरकार के आने के बाद सीमा सुरक्षा, फेंसिंग और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर माहौल कुछ बदला हुआ नजर आ रहा है।
सीमा पर दोनों देशों की बढ़ी सतर्कता
सूत्रों के मुताबिक भारत की फेंसिंग योजना के बाद बांग्लादेश ने भी अपने सीमा सुरक्षा बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। दोनों देशों के बीच करीब 4 हजार किलोमीटर लंबी सीमा है, जो दुनिया की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक मानी जाती है। इस सीमा पर अवैध घुसपैठ, मवेशी तस्करी, हथियारों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियां लंबे समय से चुनौती बनी हुई हैं।
फेंसिंग
भारत कई वर्षों से सीमा पर फेंसिंग का काम कर रहा है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा सके। हालांकि कई स्थानों पर नदी, आबादी और भूगोल संबंधी कारणों की वजह से फेंसिंग का काम पूरा नहीं हो पाया है। अब पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले के बाद इस काम में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
दोनों देशों के बीच भले ही व्यापार, कनेक्टिविटी और रणनीतिक सहयोग मजबूत हो, लेकिन सीमा सुरक्षा का मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है। हल ही के बयानबाजी ने यह संकेत जरूर दिया है कि आने वाले समय में सीमा विवाद और फेंसिंग का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में प्रमुख चर्चा का विषय बन सकता है। फिलहाल भारत और बांग्लादेश की ओर से आधिकारिक स्तर पर किसी बड़े टकराव की स्थिति नहीं दिखाई दे रही है, लेकिन दोनों देशों के नेताओं और अधिकारियों के हालिया बयानों ने सीमा मुद्दे को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।
