भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पाकिस्तान एक बार फिर परमाणु युद्ध की धमकी वाला पुराना नैरेटिव सामने ला रहा है। भारतीय ब्रह्मोस मिसाइलों के कथित हमलों और “सीमित युद्ध” की भारतीय रणनीति को लेकर पाकिस्तान के रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों में बेचैनी बढ़ती दिखाई दे रही है। पाकिस्तानी मूल के रणनीतिक विशेषज्ञ ज़फर खान ने चेतावनी दी है कि दक्षिण एशिया के दो परमाणु संपन्न देशों के बीच किसी भी सैन्य संकट के दौरान भारत द्वारा परमाणु-सक्षम ब्रह्मोस मिसाइल का उपयोग बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। उनका कहना है कि इससे “एस्केलेशन ट्रैप” यानी युद्ध के तेजी से बढ़ने वाला जाल पैदा हो सकता है, जहां हालात नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं
ब्रह्मोस हमलों ने बढ़ाई पाकिस्तान की चिंता
हाल के भारत-पाक तनाव के दौरान भारतीय सेना द्वारा कथित तौर पर ब्रह्मोस मिसाइलों के इस्तेमाल की खबरों ने पाकिस्तान की रणनीतिक चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय हमलों में पाकिस्तान के कई एयरबेस और सैन्य ढांचों को निशाना बनाया गया था। विशेष रूप से नूर खान एयरबेस पर हुए हमले को लेकर पाकिस्तान में सबसे ज्यादा चिंता दिखाई दी, क्योंकि यह एयरबेस पाकिस्तान के सामरिक ढांचे और परमाणु कमांड से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों के करीब माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान के पास मिसाइलों को पहचानने और प्रतिक्रिया देने के लिए केवल कुछ सेकंड का समय था।
सीमित युद्ध की भारतीय रणनीति पर बहस
भारत लंबे समय से यह संकेत देता रहा है कि वह परमाणु ब्लैकमेलिंग से डरकर अपनी सैन्य कार्रवाई नहीं रोकेगा। भारतीय सुरक्षा रणनीति में “सीमित युद्ध” की अवधारणा महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसमें बड़े परमाणु संघर्ष से बचते हुए सीमित सैन्य कार्रवाई की जाती है। लेकिन पाकिस्तान के कई रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक युद्ध के दौरान यह “सीमित” दायरा तेजी से टूट सकता है। उनका तर्क है कि यदि किसी पक्ष ने संवेदनशील सैन्य या रणनीतिक ठिकानों पर हमला किया, तो दूसरा पक्ष इसे बड़े खतरे के रूप में देख सकता है और प्रतिक्रिया बढ़ सकती है। ज़फर खान ने “War on the Rocks” में प्रकाशित एक विश्लेषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत जिस सीमित युद्ध मॉडल की बात करता है, वह पाकिस्तान को भी सीमित प्रतिक्रिया तक बांधे रखे, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
पाकिस्तान क्यों दे रहा परमाणु संकेत
पाकिस्तान लंबे समय से “फुल स्पेक्ट्रम डिटरेंस” यानी हर स्तर पर परमाणु प्रतिरोध की नीति अपनाता रहा है। इसका उद्देश्य भारत को बड़े पारंपरिक सैन्य हमले से रोकना है। हालांकि हाल के घटनाक्रमों में पाकिस्तान ने अपने परमाणु-सक्षम बाबर क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल नहीं किया। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि किसी भी परमाणु-सक्षम हथियार की तैयारी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु युद्ध की तैयारी के रूप में देखा जा सकता था। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान अब पारंपरिक लंबी दूरी की रॉकेट और मिसाइल क्षमताओं को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है ताकि परमाणु हथियारों का सहारा लिए बिना जवाबी कार्रवाई की जा सके। इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान Fatah-3 जैसी मिसाइलों को आगे बढ़ा रहा है।
ब्रह्मोस बनाम फतह-3
भारत की BrahMos मिसाइल को दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है। इसकी गति, सटीकता और कम समय में लक्ष्य भेदने की क्षमता इसे बेहद घातक बनाती है। पाकिस्तान की नई Fatah-3 मिसाइल को भारत की ब्रह्मोस क्षमता का जवाब माना जा रहा है, लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीकी और रणनीतिक रूप से पाकिस्तान अभी भी भारत से पीछे है। विश्लेषकों के अनुसार ब्रह्मोस का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि यह विरोधी देश को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय देता है। यही कारण है कि पाकिस्तान में इसे लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
दक्षिण एशिया में बढ़ रहा है परमाणु खतरा
भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु हथियार संपन्न देश हैं। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी दुनिया को डर था कि कहीं संघर्ष परमाणु स्तर तक न पहुंच जाए। उस समय पाकिस्तान की ओर से दिए गए बयानों को भी परमाणु चेतावनी के रूप में देखा गया था। अब विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक मिसाइल, ड्रोन, साइबर और एयर स्ट्राइक के दौर में युद्ध पहले से ज्यादा जटिल हो गया है। किसी भी गलत आकलन या जल्दबाजी में लिया गया फैसला हालात को तेजी से बिगाड़ सकता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी सैन्य टकराव पर करीबी नजर रखता है।
भारत की रणनीति
कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की रणनीति “कैलिब्रेटेड रिस्पॉन्स” यानी सीमित लेकिन सटीक जवाब देने पर आधारित है। इसका उद्देश्य बड़े युद्ध से बचते हुए आतंक या सैन्य उकसावे का जवाब देना होता है। हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान के संवेदनशील सैन्य ठिकानों के पास हमले को इस्लामाबाद अपनी परमाणु सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देख सकता है। इससे तनाव और बढ़ सकता है।
फिलहाल स्थिति
फिलहाल भारत और पाकिस्तान के बीच कोई खुला युद्ध नहीं है, लेकिन दोनों देशों के बीच रणनीतिक अविश्वास लगातार बना हुआ है। पाकिस्तान की ओर से लगातार परमाणु संकेत दिए जा रहे हैं, जबकि भारत अपनी सैन्य क्षमता और “सीमित जवाब” की नीति पर जोर देता दिखाई दे रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों को सैन्य संतुलन, संवाद और संकट प्रबंधन तंत्र को मजबूत करना होगा। क्योंकि किसी भी गलत अनुमान की कीमत सिर्फ दोनों देशों ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को चुकानी पड़ सकती है।

