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रजो चक्र : महिलाओं में हैवी ब्लीडिंग और ऐंठन को नजरअंदाज न करें, जानिए वजह

गर्मी के मौसम में कई महिलाओं को पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग, दर्द, ऐंठन, सूजन और थकान जैसी समस्याएं बढ़ी हुई महसूस हो सकती हैं। डॉक्टरों के अनुसार डिहाइड्रेशन, हार्मोनल बदलाव, तनाव, नींद की कमी और खराब खानपान इसके पीछे बड़ी वजह हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि पीरियड्स के दौरान पर्याप्त पानी पिएं, हल्का और आयरन युक्त भोजन लें तथा ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और जंक फूड से बचें। अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो, बड़े क्लॉट्स आएं या कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

कीर्तिमान नेटवर्क
19 May 2026, 12:33 PM
रायपुर
गर्मी के मौसम में कई महिलाओं और युवतियों को पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग, पेट दर्द, ऐंठन, थकान, चिड़चिड़ापन और शरीर में सूजन जैसी समस्याएं अधिक महसूस होती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी अपने आप हर महिला में हैवी पीरियड्स का सीधा कारण नहीं होती, लेकिन डिहाइड्रेशन, नींद की कमी, तनाव, खानपान में बदलाव और शरीर के तापमान में उतार-चढ़ाव पीरियड्स से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा सकते हैं। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स यानी ACOG के अनुसार यदि पीरियड्स 7 दिन से ज्यादा चलें या कई घंटों तक हर घंटे पैड या टैम्पोन बदलने की जरूरत पड़े, तो इसे हैवी मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग माना जा सकता है। 

गर्मियों में समस्या बढ़ जाती है

गर्मियों में शरीर से पसीने के जरिए पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से निकलते हैं। इससे शरीर में डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है। पानी की कमी होने पर कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर, पेट फूलना और मांसपेशियों में ऐंठन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि पीरियड्स के दौरान पहले से हो रहा दर्द और ज्यादा महसूस हो सकता है। गर्मी में नींद पूरी न होना, बेचैनी, तनाव और थकान भी हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। मासिक चक्र में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन्स शरीर के तापमान, पानी के संतुलन और फ्लूइड रेगुलेशन से जुड़े रिस्पॉन्स को प्रभावित करते हैं। रिसर्च में यह पाया गया है कि मासिक चक्र के अलग-अलग चरणों में हार्मोनल बदलाव शरीर के तापमान नियंत्रण और तरल संतुलन पर असर डाल सकते हैं।

हार्मोन्स पर असर पड़ता है

पीरियड्स के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में बदलाव होता है। यही हार्मोन गर्भाशय की परत बनने और उसके झड़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं। जब गर्मी, तनाव, नींद की कमी और डिहाइड्रेशन जैसी स्थितियां बढ़ती हैं, तो शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, थकान, सिरदर्द और पीरियड्स के दौरान असहजता ज्यादा महसूस हो सकती है।
हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि यदि हर महीने ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो रही है, बड़े थक्के आ रहे हैं या पीरियड्स लंबे समय तक चल रहे हैं, तो इसे सिर्फ मौसम का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। NHS के अनुसार हैवी पीरियड्स के पीछे फाइब्रॉइड, एंडोमेट्रियोसिस, एडेनोमायोसिस, PCOS, पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज, ब्लीडिंग डिसऑर्डर या कुछ दवाएं भी कारण हो सकती हैं।

हैवी पीरियड्स की चिंता 

यदि पीरियड्स के दौरान हर 1-2 घंटे में पैड बदलना पड़ रहा है, रात में बार-बार उठकर पैड बदलना पड़ रहा है, खून के बड़े थक्के आ रहे हैं, ब्लीडिंग 7 दिन से ज्यादा चल रही है या कमजोरी, सांस फूलना और चक्कर जैसे लक्षण हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। Mayo Clinic के अनुसार लगातार कई घंटों तक हर घंटे पैड या टैम्पोन बदलने की जरूरत, 7 दिन से ज्यादा ब्लीडिंग और बड़े क्लॉट्स हैवी मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। CDC के अनुसार हैवी पीरियड्स के कारण रोजमर्रा का काम प्रभावित होना, रात में पैड बदलने की जरूरत पड़ना और बड़े थक्के आना भी जांच कराने वाले संकेत हैं।

दर्द और ऐंठन क्यों बढ़ती है

पीरियड्स के दौरान गर्भाशय की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, ताकि गर्भाशय की परत बाहर निकल सके। इस प्रक्रिया में प्रोस्टाग्लैंडिन नामक केमिकल की भूमिका होती है। जब प्रोस्टाग्लैंडिन अधिक बनते हैं, तो दर्द और ऐंठन ज्यादा हो सकती है। गर्मियों में डिहाइड्रेशन, शरीर में नमक-पानी की कमी और थकान ऐंठन को और बढ़ा सकते हैं। ऐसे में पेट और कमर में दर्द, जांघों में खिंचाव, सिरदर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है। हल्का भोजन, पर्याप्त पानी, आराम और गर्म पानी की थैली से सेक करने से कुछ राहत मिल सकती है।

सूजन और पेट फूलने से कैसे बचें

पीरियड्स से पहले और दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण शरीर में पानी रुक सकता है। इससे पेट फूलना, शरीर भारी लगना, स्तनों में संवेदनशीलता और चेहरे या हाथ-पैर में हल्की सूजन महसूस हो सकती है। गर्मी में ज्यादा नमकीन, पैकेज्ड, तला-भुना और मसालेदार भोजन लेने से यह समस्या और बढ़ सकती है। इससे बचने के लिए नमक कम करें, दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, खीरा, तरबूज, दही और हल्का भोजन लें। ज्यादा चाय-कॉफी, कोल्ड ड्रिंक और जंक फूड से परहेज करें।

ठण्ड में समस्या 

रिसर्च और मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी और ठंड दोनों मौसम पीरियड्स को अलग-अलग तरीके से प्रभावित कर सकते हैं। गर्मियों में तेज तापमान, डिहाइड्रेशन और हार्मोनल बदलाव के कारण कई महिलाओं को ज्यादा ब्लीडिंग, थकान, सूजन और कमजोरी महसूस हो सकती है। वहीं सर्दियों में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने और शरीर में जकड़न बढ़ने के कारण दर्द, ऐंठन, सुस्ती और मूड स्विंग ज्यादा महसूस हो सकते हैं। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि इसका असर हर महिला में अलग-अलग होता है। यदि किसी भी मौसम में लगातार बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, बड़े क्लॉट्स, अत्यधिक दर्द या अनियमित पीरियड्स की समस्या हो रही हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

क्या खाएं

गर्मी और पीरियड्स के दौरान शरीर को पानी, आयरन और ऊर्जा की जरूरत होती है। इसलिए खीरा, तरबूज, खरबूजा, नारियल पानी, छाछ, दही, नींबू पानी, सत्तू, मूंग दाल, हरी पत्तेदार सब्जियां, अनार, चुकंदर, दालें, गुड़-चना और फल फायदेमंद हो सकते हैं। यदि ब्लीडिंग ज्यादा होती है, तो शरीर में आयरन की कमी का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में आयरन-युक्त भोजन और विटामिन-C वाले फल मददगार हो सकते हैं, लेकिन आयरन सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।

क्या न खाएं

गर्मी में पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार, प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा नमक, ज्यादा चीनी, कोल्ड ड्रिंक, शराब और अत्यधिक चाय-कॉफी से बचना चाहिए। ये चीजें डिहाइड्रेशन, एसिडिटी, पेट फूलना और थकान बढ़ा सकती हैं।

डॉक्टर से मिलना जरूरी

अगर हैवी ब्लीडिंग बार-बार हो रही है, पीरियड्स बहुत दर्दनाक हैं, ब्लीडिंग के कारण रोजमर्रा का काम प्रभावित हो रहा है, पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग हो रही है या चक्कर और अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलना जरूरी है। NHS Inform के अनुसार हैवी पीरियड्स कई बार बिना स्पष्ट कारण के भी हो सकते हैं, लेकिन कई मामलों में फाइब्रॉइड, एडेनोमायोसिस या एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थितियां भी इसके पीछे हो सकती हैं।
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