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सुपर अलनीनो
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सुपर अलनीनो का खतरा : 2026 में रिकॉर्ड गर्मी, कमजोर मानसून, प्राकृतिक आपदाओं का बढ़ संकट

National Oceanic and Atmospheric Administration यानी NOAA ने चेतावनी दी है कि 2026 में “सुपर अलनीनो” विकसित हो सकता है, जिसका असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। इसके कारण भारत में मानसून कमजोर होने, रिकॉर्ड गर्मी, सूखा, जल संकट और कृषि उत्पादन में गिरावट का खतरा बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि प्रशांत महासागर का तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो 2026-27 दुनिया के सबसे गर्म और चुनौतीपूर्ण वर्षों में शामिल हो सकते हैं।

कीर्तिमान नेटवर्क
16 May 2026, 03:19 PM
📍 नई दिल्ली
भारत और दुनिया के लिए साल 2026 मौसम के लिहाज से बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ता समुद्री तापमान इस बार “सुपर अलनीनो” का रूप ले सकता है। अगर ऐसा हुआ तो भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है, भीषण गर्मी बढ़ सकती है और कई राज्यों में सूखा तथा बाढ़ जैसी चरम मौसम घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।
अमेरिका की प्रमुख मौसम एजेंसी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन यानी NOAA के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने अपने ताजा पूर्वानुमान में कहा है कि अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच सुपर अलनीनो बनने की संभावना तेजी से बढ़ रही है। एजेंसी के अनुसार मई-जुलाई 2026 के बीच अलनीनो विकसित होने की 82 प्रतिशत संभावना है, जबकि इसके पूरे सर्दियों तक बने रहने की संभावना 96 प्रतिशत बताई गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि समुद्र का तापमान इसी गति से बढ़ता रहा तो आने वाला समय दुनिया के लिए गंभीर जलवायु संकट का संकेत हो सकता है। 

सुपर अलनीनो क्या है 

अलनीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री तापमान सामान्य से काफी अधिक बढ़ जाता है। यह तापमान वृद्धि वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करती है और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का संतुलन बिगाड़ देती है। जब समुद्र का तापमान असामान्य रूप से बहुत अधिक बढ़ जाता है और उसका प्रभाव अत्यधिक शक्तिशाली हो जाता है, तब इसे “सुपर अलनीनो” कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार सुपर अलनीनो सिर्फ समुद्र तक सीमित घटना नहीं है, बल्कि यह पूरी पृथ्वी की जलवायु प्रणाली को प्रभावित करता है। इसकी वजह से कहीं अत्यधिक बारिश होती है, कहीं भीषण सूखा पड़ता है, कहीं तूफान तेज हो जाते हैं और कई देशों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी देखने को मिलती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इतिहास में 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में आए सुपर अलनीनो ने वैश्विक स्तर पर भारी तबाही मचाई थी। इन वर्षों में कई देशों में खाद्य संकट, जल संकट और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति पैदा हुई थी। अब 2026 में फिर वैसी ही स्थिति बनने की आशंका ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। 

भारत पर असर

भारत के लिए अलनीनो हमेशा चिंता का विषय रहा है क्योंकि भारतीय मानसून पर इसका सीधा असर पड़ता है। भारत की अर्थव्यवस्था और कृषि का बड़ा हिस्सा मानसूनी बारिश पर निर्भर करता है। यदि बारिश सामान्य से कम होती है तो इसका असर खेती, जल स्रोतों, बिजली उत्पादन और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है।भारतीय मौसम विभाग  यानी IMD पहले ही यह आशंका जता चुका है कि अलनीनो के कारण 2026 में मानसूनी बारिश सामान्य से कम हो सकती है। यदि सुपर अलनीनो विकसित होता है, तो उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी हिस्सों में बारिश की भारी कमी देखी जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर मानसून के कारण कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। जलाशयों में पानी कम हो सकता है, भूजल स्तर गिर सकता है और पीने के पानी का संकट गहरा सकता है। ग्रामीण इलाकों में खेती पर निर्भर लाखों किसानों की आय प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा बिजली की मांग तेजी से बढ़ सकती है, क्योंकि भीषण गर्मी के दौरान एयर कंडीशनर और कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ जाता है। खाद्यान्न उत्पादन घटने से अनाज, दाल और सब्जियों की कीमतों में भी तेजी आ सकती है। 

गर्मी का रिकॉर्ड

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि सुपर अलनीनो के कारण 2026 और 2027 दुनिया के सबसे गर्म वर्षों में शामिल हो सकते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक समुद्र की अतिरिक्त गर्मी वातावरण में पहुंचकर वैश्विक तापमान को तेजी से बढ़ा सकती है। भारत में इसका असर बेहद गंभीर हो सकता है। उत्तर भारत, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में लंबे और तीव्र हीटवेव देखने को मिल सकते हैं। कई शहरों में तापमान 48 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि बढ़ती गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं। बुजुर्ग, छोटे बच्चे और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। अस्पतालों पर दबाव बढ़ सकता है और कई शहरों में बिजली तथा पानी की भारी किल्लत भी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। सूखे जंगल और बढ़ता तापमान पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि समय रहते तैयारी नहीं की गई तो यह गर्मी कई देशों के लिए आपदा साबित हो सकती है। 

कृषि क्षेत्र पर संकट

भारत में सुपर अलनीनो का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। मानसून कमजोर होने से धान, दाल, गन्ना, मक्का और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलें प्रभावित हो सकती हैं।  विशेषज्ञों के मुताबिक बारिश कम होने से किसानों को बुवाई में देरी का सामना करना पड़ सकता है। कई इलाकों में खेत सूखे रह सकते हैं, जिससे उत्पादन कम हो सकता है। सिंचाई की लागत बढ़ सकती है और किसानों को ज्यादा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यदि सूखे की स्थिति बनी रहती है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ सकता है। खाद्यान्न उत्पादन घटने से देश में महंगाई बढ़ सकती है और आम लोगों के लिए खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को अभी से वैकल्पिक फसलों, जल संरक्षण और सिंचाई योजनाओं पर काम शुरू करना होगा ताकि संभावित संकट का असर कम किया जा सके। 

दुनिया भर में “सुपर अलनीनो के असर

सुपर अलनीनो सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित कर सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार अमेरिका और चीन के कुछ हिस्सों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है, जबकि ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में सूखे का खतरा बढ़ सकता है। अफ्रीका के कई क्षेत्रों में खाद्य संकट गहरा सकता है, क्योंकि वहां पहले से ही जल संकट और कृषि समस्याएं मौजूद हैं। वहीं अमेजन के जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच सकता है। World Meteorological Organization यानी WMO ने भी कहा है कि अलनीनो वैश्विक तापमान और बारिश के पैटर्न को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुपर अलनीनो शक्तिशाली हुआ तो इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। 

वैज्ञानिकों ने क्यों बढ़ाई चिंता

हाल के हफ्तों में प्रशांत महासागर के तापमान में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। कई वैश्विक मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि यह अलनीनो सामान्य नहीं बल्कि बेहद शक्तिशाली हो सकता है।कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समुद्र का तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो 2026 का सुपर अलनीनो इतिहास के सबसे शक्तिशाली अलनीनो में शामिल हो सकता है। इससे पहले 1997-98 के सुपर अलनीनो ने दुनिया भर में मौसम का संतुलन बिगाड़ दिया थाहालांकि वैज्ञानिक यह भी कह रहे हैं कि अभी अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, क्योंकि ENSO पूर्वानुमानों में कुछ अनिश्चितताएं बनी रहती हैं। फिर भी मौजूदा संकेत दुनिया भर की मौसम एजेंसियों की चिंता बढ़ाने के लिए काफी हैं। 

क्या भारत इसके लिए तैयार है

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अभी से तैयारी शुरू करनी होगी। जल संरक्षण, बिजली प्रबंधन, कृषि रणनीति और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत होगी।  विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि सरकार को जल संरक्षण अभियान तेज करने चाहिए। किसानों को कम पानी वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करना होगा। शहरों में हीटवेव से बचाव के लिए विशेष एक्शन प्लान तैयार करने होंगे। इसके अलावा अस्पतालों, बिजली आपूर्ति और पानी वितरण प्रणाली को मजबूत करना जरूरी होगा, ताकि चरम मौसम की स्थिति में आम लोगों को कम परेशानी हो।

आने वाले महीनों परअसर 

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर प्रशांत महासागर में बढ़ते तापमान और मौसम एजेंसियों के अगले अपडेट पर टिकी हुई है। यदि सुपर अलनीनो विकसित होता है, तो 2026 और 2027 दुनिया के लिए जलवायु संकट के सबसे चुनौतीपूर्ण वर्षों में शामिल हो सकते हैं। वैज्ञानिकों की चेतावनी साफ है — आने वाला समय सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं बल्कि मानव जीवन, खेती, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। ऐसे में दुनिया के सभी देशों को अभी से सतर्क रहने और तैयारी शुरू करने की जरूरत है। 

अलनीनो का इतिहास

अलनीनो का असर कई बार दुनिया और भारत पर गंभीर रूप से देखा जा चुका है। 1877-78 में आए सुपर अलनीनो के कारण भारत समेत कई देशों में भीषण सूखा और अकाल पड़ा था। 1982-83 का अलनीनो 20वीं सदी के सबसे शक्तिशाली अलनीनो में शामिल रहा, जिससे दुनिया भर में बाढ़ और सूखे जैसी स्थिति बनी। 1997-98 का सुपर अलनीनो इतिहास के सबसे चर्चित अलनीनो में गिना जाता है। इस दौरान कई देशों में भारी बारिश, जंगलों में आग और रिकॉर्ड गर्मी देखने को मिली। भारत में 2002 और 2009 के दौरान अलनीनो के कारण मानसून कमजोर रहा, जिससे खेती और जल संकट प्रभावित हुआ। 2015-16 के सुपर अलनीनो के दौरान भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में रिकॉर्ड गर्मी और भीषण हीटवेव देखने को मिली थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण अब अलनीनो पहले से ज्यादा खतरनाक होता जा रहा है, इसलिए 2026 के संभावित सुपर अलनीनो को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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