सोनिका गिल... ये नाम सुनते ही फिल्म राम लखन की ‘विविया’ याद आ जाती है। अपनी नीली आंखों और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों का दिल जीतने वाली सोनिका की जिंदगी पर्दे जितनी चमकदार नहीं रही। सफलता, हादसे, संघर्ष और निजी दुखों से भरी उनकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।
दिल्ली से मुंबई तक का संघर्ष
दिल्ली में पली-बढ़ीं सोनिका गिल क्लासिकल डांस में प्रशिक्षित थीं। स्कूल के दिनों में वे सोनू निगम के साथ स्टेज परफॉर्मेंस करती थीं। मुंबई आने के बाद उन्होंने छोटे-छोटे रोल से शुरुआत की और करीब एक दशक तक संघर्ष किया।
फिल्म निर्देशक सुभाष घई ने सोनिका की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें तीन फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट दिया। उस समय बड़ी अभिनेत्रियां संगीता बिजलानी और सोनू वालिया भी दौड़ में थीं, लेकिन मौका सोनिका को मिला। राम लखन की सफलता ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया।
सफलता के साथ विवाद भी आए। सोनिका के बारे में अफवाह फैलाई गई कि वे सेट पर शराब और सिगरेट का सेवन करती हैं। हालांकि 2024 के एक इंटरव्यू में उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया और बताया कि यह सब उन्हें बदनाम करने की साजिश थी।
एक हादसे ने बदल दी जिंदगी
जनवरी 1992 में एक गंभीर सड़क हादसे में सोनिका का पैर टूट गया। इस हादसे ने उनका करियर रोक दिया। खलनायक जैसी बड़ी फिल्म उनके हाथ से निकल गई और उनकी जगह राम्या कृष्णन को मौका मिला। हादसे के बाद भी सोनिका ने हार नहीं मानी। उन्होंने तिरंगा और घर की इज्जत जैसी फिल्मों में दर्द के बावजूद काम किया। अभिनेता राज कुमार ने उनके संघर्ष को देखकर शूटिंग में उनका खास ध्यान रखा।
निजी जिंदगी में भी झेले कई दुख
करियर में गिरावट और भाई की मौत के बाद सोनिका दुबई चली गईं, जहां उन्होंने रेस्टोरेंट मैनेजर की नौकरी की। भारत लौटने के बाद उन्होंने अपनी मां को भी खो दिया, लेकिन फिर फिल्मों और टीवी की ओर लौटकर खुद को संभाला।
सोनिका ने 40 की उम्र के बाद बिजनेसमैन मितेश रुघानी से शादी की। आज वे अपने पति, उनकी पहली पत्नी और बच्चों के साथ एक ‘ब्लेंडेड फैमिली’ में खुशहाल जीवन जी रही हैं। उनका मानना है—“एक औरत दूसरी औरत से नफरत क्यों करे?”
