"लखपति_दीदी" के लिए 40 परिणाम मिले
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Bihan Yojana: कोरिया की प्रतिमा सूर्यवंशी बनीं लखपति दीदी,गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
Bihan Yojana: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर कोरिया जिले के धनपुर गांव की प्रतिमा सूर्यवंशी ने आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। चांद स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बैंक से 2 लाख रुपये का ऋण लेकर अपने घर में किराना दुकान शुरू की।
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Bihan Yojana: आत्मविश्वास और मेहनत से संतोषी ने हासिल किया लखपति दीदी का मुकाम
Bihan Yojana: कोरिया जिले की संतोषी देवांगन ने आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर पारंपरिक बकरी पालन को सफल व्यवसाय में बदल दिया। बिहान स्व सहायता समूह से जुड़कर आर्थिक मदद प्राप्त की और आज लखपति दीदी बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
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Bihan Mission Success: ग्रामीण महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का सहारा, 13.96 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
Bihan Mission Success: छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के तहत संचालित लखपति महिला पहल ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2023-26 के लिए केंद्र सरकार द्वारा तय 7.82 लाख महिलाओं के लक्ष्य के मुकाबले प्रदेश में अब तक 13.96 लाख ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाया जा चुका है। यह उपलब्धि निर्धारित लक्ष्य का 179 प्रतिशत है।
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Mahtari Vandan Yojana: महिलाओं के सशक्तिकरण की मिसाल बनीं सुमन लता, मेहनत से हासिल की लखपति दीदी की पहचान
Mahtari Vandan Yojana: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की सुमन लता वाकरे ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। 15 हजार रुपये की आरएफ राशि और समूह की सहायता से शुरू की गई किराना दुकान आज उनकी सालाना एक लाख रुपये से अधिक आय का जरिया बन चुकी है। उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी है।
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Mahtari Vandan Yojana: 68 लाख महिलाओं को मिला सहारा, लखपति दीदी बनने की राह हुई आसान
Mahtari Vandan Yojana: छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का माध्यम बन रही है। योजना के तहत 68 लाख से अधिक महिलाओं को हर महीने ₹1000 की सहायता मिल रही है। इसके साथ ऋण और स्वयं सहायता समूहों की मदद से हजारों महिलाएं स्वरोजगार शुरू कर लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
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Lakhpati Didi : सरकारी सहयोग और मेहनत का कमाल, लखपति दीदी बनीं कमलेश यादव
Lakhpati Didi: मरवाही विकासखंड की कमलेश यादव ने महिला स्वसहायता समूह से जुड़कर चिकन स्टोर और सिलाई कार्य को आय का जरिया बनाया। समूह से मिले आर्थिक सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई है।
सुशासन तिहार : आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती लखपति दीदी से करोड़पति दीदी तक की कहानी
कबीरधाम जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ग्राम लोखान के कमराखोल में ग्रामीणों और महिलाओं से संवाद किया। आम के पेड़ के नीचे हुई चौपाल में महिलाओं ने अपने संघर्ष और आत्मनिर्भर बनने की कहानियाँ साझा कीं। बिहान योजना से जुड़ी कई महिलाएं अब “लखपति दीदी” बन चुकी हैं और आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हें और आगे बढ़कर “करोड़पति दीदी” बनने का लक्ष्य रखने के लिए प्रेरित किया।
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स्व-सहायता समूह से बदली तकदीर: डेयरी और खेती से ‘लखपति दीदी’ बनीं माधुरी जंघेल
छत्तीसगढ़ की माधुरी जंघेल ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर डेयरी, खेती और पशु आहार व्यवसाय के जरिए सालाना 5.50 लाख रुपये की आय हासिल की और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं।
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Seva Sankalp Abhiyan: सुशासन से संवर रहा छत्तीसगढ़, जनकल्याण से बदल रही तस्वीर
Seva Sankalp Abhiyan: सुशासन और जनकल्याण की योजनाओं से छत्तीसगढ़ में गांव, गरीब, किसान, महिला, बच्चे और युवाओं के जीवन में बदलाव की तस्वीर सामने आ रही है। सुरक्षित आवास, डिजिटल सेवाएं, महिला सशक्तिकरण, सुपोषण, कृषि और पशुपालन जैसी पहलें लोगों को बेहतर सुविधाओं के साथ आत्मनिर्भरता और सम्मान का अवसर दे रही हैं।
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Lakhpati Didi: बिहान योजना ने बदली तकदीर, राजनांदगांव की दिनेश्वरी की सालाना आय पहुंची डेढ़ लाख
Lakhpati Didi: राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड की दिनेश्वरी सोरी ने बिहान योजना और स्वसहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। समूह से मिले सहयोग के जरिए उन्होंने अगरबत्ती, मशरूम, साबुन, मोमबत्ती सहित कई उत्पादों का निर्माण शुरू किया। स्वरोजगार से जुड़ने के बाद उनकी पारिवारिक आय 52 हजार रुपए से बढ़कर करीब 1.50 लाख रुपए सालाना हो गई है।
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Lakhpati Didi: ममता कैवर्त ने सिलाई-कढ़ाई और फैंसी स्टोर से बदली परिवार की तस्वीर
Lakhpati Didi: महासमुंद जिले के ग्राम गढ़पटनी की ममता कैवर्त ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर सिलाई-कढ़ाई और फैंसी स्टोर संचालन को रोजगार का माध्यम बनाया। समूह के सहयोग और प्रशिक्षण से उनकी परिवार की वार्षिक आय 97 हजार रुपये से बढ़कर 2 लाख 24 हजार 500 रूपए तक पहुंच गई।
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Chhattisgarh Agriculture: गाय पालन और सब्जी बाड़ी से बदली निधि तिवारी की जिंदगी, अब सालाना कमाई ढाई लाख रुपए
Chhattisgarh Agriculture: पेण्ड्रा विकासखंड की निधि तिवारी ने स्व सहायता समूह से जुड़कर पशुपालन और सब्जी बाड़ी को अपनी आजीविका का आधार बनाया। 10 हजार रुपये की सहायता से शुरू हुआ उनका सफर आज सालाना करीब ढाई लाख रुपये की आय तक पहुंच गया है। गाय पालन और टमाटर सहित मौसमी सब्जियों की खेती से वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।