Bihaan Yojana: मजबूत इरादे और मेहनत के साथ सही समय पर मिला आर्थिक सहयोग किस तरह एक ग्रामीण महिला के जीवन में बदलाव ला सकता है, इसकी मिसाल सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बगदरी की अश्वनी राजवाड़े हैं। कभी खेती के लिए पूंजी की व्यवस्था करने में परेशान रहने वाली अश्वनी आज खीरे की खेती से अच्छी आमदनी कमा रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बिहान योजना के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। समूहों के माध्यम से ऋण की सुविधा मिलने से महिलाएं अपनी रुचि और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप स्वरोजगार शुरू कर रही हैं। अश्वनी राजवाड़े ने भी इसी अवसर का लाभ उठाकर खेती को आर्थिक उन्नति का माध्यम बनाया है।
’समूह से मिले डेढ़ लाख रुपये के ऋण से बदली आर्थिक स्थिति’
अश्वनी राजवाड़े दीप्ति महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें खेती-किसानी को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहयोग मिला। समूह से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने ढाई एकड़ भूमि में खीरे की खेती शुरू की। उनकी मेहनत रंग लाई और इस वर्ष खीरे की अच्छी पैदावार हुई है। वर्तमान में फसल की तुड़ाई जारी है और उपज की बिक्री से उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है।
अश्वनी बताती हैं कि पहले आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण खेती का विस्तार करना कठिन था। जरूरत के समय ऋण की व्यवस्था करने में भी परेशानी होती थी। बिहान योजना से जुड़ने के बाद समूह के माध्यम से समय-समय पर ऋण की सुविधा मिलने लगी। इससे उन्हें खेती में निवेश करने और अपनी आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
’घर से ही बिक रही उपज, बिहार तक पहुंच रहा खीरा’
अश्वनी राजवाड़े की खीरे की खेती अब व्यावसायिक रूप ले चुकी है। अच्छी गुणवत्ता और पैदावार के कारण व्यापारी स्वयं उनके पास पहुंचकर खीरे की खरीद कर रहे हैं। उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए बाजार जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उनके खेत से निकला हुआ खीरा बिहार तक भेजा जा रहा है।अश्वनी ने बताया कि व्यापारियों द्वारा घर से ही खीरे की खरीद किए जाने से बिक्री की परेशानी दूर हुई है। फसल की अच्छी पैदावार और बाजार में मांग से उन्हें अच्छी आमदनी मिल रही है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और खेती को आगे बढ़ाने के लिए उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
खुद बनीं आत्मनिर्भर, गांव के 20 से 25 लोगों को भी दिया रोजगार
अश्वनी की सफलता की विशेष बात यह है कि उन्होंने अपनी आर्थिक प्रगति के साथ गांव के अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार किए हैं। खीरे की खेती में फसल की देखरेख, तुड़ाई और अन्य कृषि कार्यों के लिए प्रतिदिन लगभग 20 से 25 स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। अश्वनी बताती हैं कि अपनी खेती से अच्छी आमदनी होने के साथ गांव के लोगों को रोजगार मिलना उनके लिए खुशी की बात है। बिहान योजना ने उन्हें इस योग्य बनाया है कि वे अपने परिवार के साथ अन्य परिवारों की आजीविका में भी योगदान दे पा रही हैं।
’बिहान से मिला आर्थिक संबल, बच्चों को दिला रहीं बेहतर शिक्षा’
अश्वनी ने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले उन्हें खेती से संबंधित जानकारी और आर्थिक सहयोग का अभाव था। बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला। समूह के सहयोग से खेती का विस्तार हुआ और परिवार की आय में वृद्धि हुई। उनके पति भी खेती-किसानी करते हैं। दोनों मिलकर कृषि कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। आर्थिक स्थिति बेहतर होने से वे अपने दोनों बच्चों को अच्छे स्कूल में शिक्षा दिला पा रही हैं। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी प्रयास कर रही हैं। अश्वनी कहती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब वे आर्थिक रूप से सक्षम हैं और परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में अपनी भूमिका निभा रही हैं। स्वरोजगार से मिली सफलता के कारण समाज में उनका सम्मान भी बढ़ा है।
’लखपति दीदी बनकर अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा’
अश्वनी राजवाड़े ने बताया कि बिहान योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। समूह से मिले आर्थिक सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर आज वे लखपति दीदी बन गई हैं। खीरे की खेती से अच्छी आमदनी प्राप्त करने के साथ अन्य लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अश्वनी राजवाड़े ने अपनी सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। आज वे खीरे की खेती से अच्छी आमदनी प्राप्त कर रही हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी योगदान दे रही हैं।







