रायगढ़ पुलिस ने नशे के सौदागरों के खिलाफ अपने कड़े तेवर बरकरार रखते हुए 'ऑपरेशन आघात' के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। रेलवे स्टेशन के पास मंदिर की छांव में बैठकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश कर रहे ओडिशा के तीन तस्करों को संयुक्त टीम ने धर दबोचा। इनके पास से लगभग 18 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया है, जिसे ये मध्य प्रदेश खपाने की तैयारी में थे।
भक्ति की आड़ में तस्करी का खेल
रायगढ़ रेलवे स्टेशन के बाहर शिव मंदिर के पास पीपल के पेड़ के नीचे बैठे तीन लोग पहली नजर में सामान्य यात्री ही लग रहे थे। वे शांति से अपने सामान के साथ किसी वाहन का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में मुस्तैद कोतवाली, साइबर और रेलवे पुलिस (RPF) की संयुक्त टीम को मुखबिर से पुख्ता जानकारी मिली थी कि स्टेशन पार्किंग क्षेत्र में कुछ संदिग्ध भारी बैगों के साथ मौजूद हैं।
जैसे ही पुलिस की घेराबंदी मजबूत हुई और संदिग्धों के बैग व ट्रॉली खोले गए, वहां मौजूद लोग दंग रह गए। बैगों में कपड़ों की जगह गांजे के बड़े पैकेट ठूंस-ठूंस कर भरे गए थे।
जब्ती और आरोपियों का विवरण
पुलिस ने मौके से कुल 17.726 किलोग्राम गांजा बरामद किया, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 1.76 लाख रुपये आंकी गई है। गांजे के अलावा आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और अन्य सामग्री जब्त की गई है, जिससे कुल जब्ती 1.79 लाख रुपये तक पहुंच गई है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
सिद्धांत गोन्डा (28 वर्ष): निवासी कंधमाल, ओडिशा।
कश्यप साहनी (45 वर्ष): निवासी कंधमाल, ओडिशा।
चंद्रिका साहनी (40 वर्ष): निवासी कंधमाल, ओडिशा (कश्यप की पत्नी)।
ओडिशा से मध्य प्रदेश का 'सप्लाई रूट'
पूछताछ के दौरान यह खुलासा हुआ कि ये तस्कर ओडिशा के कंधमाल जिले से अवैध खेप लेकर निकले थे और इसे मध्य प्रदेश के खुरई में ऊंचे दामों पर बेचने की योजना थी। रायगढ़ को इन्होंने एक 'ट्रांजिट पॉइंट' के रूप में चुना था, जहां से वे आगे के सफर के लिए गाड़ी बदलने वाले थे। पुलिस को आरोपियों के पास से परिवहन से जुड़ा कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला।
"रायगढ़ में नशे का अवैध कारोबार करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। 'ऑपरेशन आघात' के जरिए हम सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
— शशि मोहन सिंह, एसएसपी, रायगढ़
पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति
कोतवाली प्रभारी सुखनंदन पटेल और साइबर थाना प्रभारी विजय चेलक के नेतृत्व में टीम ने आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई में RPF निरीक्षक कुलदीप कुमार और उनकी टीम का भी विशेष सहयोग रहा।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि मध्य प्रदेश में इनके संपर्क सूत्र कौन थे और क्या रायगढ़ के भीतर भी इनका कोई स्थानीय नेटवर्क सक्रिय है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।
